Lloyds Metals and Energy Ltd (LMEL) के प्रमोटर ग्रुप ने State Bank of India से लिए गए लोन के बदले 'नॉन-डिस्पोजल अंडरटेकिंग' (NDU) एग्रीमेंट किया है। कंपनी ने साफ किया है कि यह शेयर गिरवी (Pledge) रखने जैसा नहीं है, बल्कि प्रमोटर्स अपने पास ही पूरी ओनरशिप और वोटिंग राइट्स रखेंगे।
क्या है यह पूरा मामला?
Lloyds Metals and Energy के प्रमोटर्स ने SBICAP Trustee के पक्ष में अपने शेयरों पर एक 'नॉन-डिस्पोजल अंडरटेकिंग' (NDU) साइन की है। यह एग्रीमेंट कंपनी द्वारा State Bank of India से लिए गए रुपी टर्म लोन के बदले में किया गया है।
शेयर प्लेज और NDU में अंतर
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि यह सामान्य शेयर प्लेज (Pledge) से अलग है। सामान्य प्लेज में अगर स्टॉक की कीमत गिरती है, तो मार्जिन कॉल का खतरा बना रहता है, जिससे कभी-कभी फोर्स सेलिंग की स्थिति आ जाती है। वहीं, NDU केवल एक कानूनी वादा है कि प्रमोटर्स लोन की अवधि के दौरान इन शेयरों को बेच या ट्रांसफर नहीं करेंगे।
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि प्रमोटर्स के पास शेयरों का मालिकाना हक, डिविडेंड लेने का अधिकार और वोटिंग राइट्स पूरी तरह से बरकरार रहेंगे।
किन लोगों ने किया एग्रीमेंट?
SEBI के नियमों के तहत दी गई जानकारी के मुताबिक, 26 अगस्त 2026 से 4 सितंबर 2026 के बीच यह एग्रीमेंट पूरा किया गया। इसमें रवि बाबूलाल अग्रवाल, राजेश राजनारायण गुप्ता और Thriveni Earthmovers Private Limited जैसी प्रमुख प्रमोटर हस्तियां शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
कंपनी के कामकाज या कैपिटल स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह कदम केवल बैंकिंग रेगुलेशन और लॉन्ग-टर्म लोन की शर्तों को पूरा करने के लिए उठाया गया है। निवेशकों को कंपनी की डेट-सर्विसिंग कैपेसिटी और लोन अदायगी के बाद इन अंडरटेकिंग्स के रिलीज होने पर नजर रखनी चाहिए।
