Lactose India Share Warrants: क्या होगा इन 15 लाख वॉरंट्स का? नॉन-पेमेंट पर कंपनी लेगी बड़ा फैसला

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AuthorNeha Patil|Published at:
Lactose India Share Warrants: क्या होगा इन 15 लाख वॉरंट्स का? नॉन-पेमेंट पर कंपनी लेगी बड़ा फैसला

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Lactose India के शेयरधारकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कंपनी के बोर्ड ने **18 जून 2026** को एक अहम मीटिंग बुलाई है। इस मीटिंग में **15,00,000** शेयर वॉरंट्स को कैंसल करने पर विचार किया जाएगा, जो SG General Dealers LLP को अलॉट किए गए थे। वजह है इनका पेमेंट न होना।

वॉरंट्स कैंसल होने से क्या होगा?

Lactose India लिमिटेड का बोर्ड 18 जून 2026 को होने वाली अपनी मीटिंग में 15,00,000 कनवर्टिबल शेयर वॉरंट्स को फॉरफीट (कैंसल) करने पर फैसला ले सकता है। ये वॉरंट्स M/s. SG General Dealers LLP को प्रेफरेंशियल बेसिस पर अलॉट किए गए थे। SEBI के नियमों के तहत, अलॉटी द्वारा बाकी पेमेंट न करने की वजह से इन्हें कैंसल करने का प्रस्ताव है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?

यह कॉर्पोरेट एक्शन शेयरधारकों के लिए अच्छी खबर है क्योंकि इससे उनके शेयर की हिस्सेदारी (इक्विटी डाइल्यूशन) कम नहीं होगी। अगर ये वॉरंट्स कनवर्ट हो जाते, तो मौजूदा निवेशकों की हिस्सेदारी घट जाती। हालांकि, यह कैंसलेशन इस बात का संकेत है कि कंपनी के कैपिटल रेज (पूंजी जुटाने) के प्रयास इस खास अलॉटी के साथ फेल हो गए हैं।

पूरा मामला क्या है?

Lactose India लिमिटेड ने पहले M/s. SG General Dealers LLP को प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के तहत ये कनवर्टिबल वॉरंट्स दिए थे। SEBI (Issue of Capital and Disclosure Requirements) Regulations, 2018 के नियमों के मुताबिक, इन वॉरंट्स को इक्विटी शेयर्स में बदलने के लिए बाकी पेमेंट करना जरूरी था।

आगे क्या?

अगर बोर्ड फॉरफीचर को मंजूरी देता है, तो 15,00,000 वॉरंट्स रद्द कर दिए जाएंगे। इसका मतलब है कि SG General Dealers LLP को इन वॉरंट्स के बदले इक्विटी शेयर्स नहीं मिलेंगे। नतीजतन, कंपनी के कुल आउटस्टैंडिंग शेयर्स की संख्या इस अलॉटमेंट से नहीं बढ़ेगी और मौजूदा इक्विटी स्ट्रक्चर बना रहेगा।

जोखिम और चिंताएं

इसमें सबसे बड़ा जोखिम यह है कि काउंटरपार्टी (SG General Dealers LLP) अपनी फाइनेंशियल ऑब्लिगेशन्स को पूरा करने में असमर्थ रही है। यह उनकी लिक्विडिटी की समस्या या इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी में बदलाव का संकेत हो सकता है। इससे कंपनी की भविष्य की कैपिटल रेजिंग योजनाओं और डील काउंटरपार्टी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.