Kirloskar Electric Company ने Kotak Mahindra Bank से **₹100 करोड़** की क्रेडिट फैसिलिटी हासिल की है। इस फंड को दो हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें प्रमोटर की गारंटी और अन्य संबंधित कंपनियों की संपत्ति को गिरवी रखा गया है।
फंडिंग का गणित
कंपनी के बोर्ड ने ₹100 करोड़ के क्रेडिट को मंजूरी दी है, जिसे ₹50-50 करोड़ के दो हिस्सों में बांटा गया है। पहली ₹50 करोड़ की ओवरड्राफ्ट सुविधा Kirloskar Power Equipments Limited की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बदले ली गई है। दूसरी ₹50 करोड़ की ड्रॉप लाइन ओवरड्राफ्ट सुविधा कंपनी के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन और प्रमोटर, विजय आर. किर्लोस्कर की व्यक्तिगत गारंटी पर आधारित है।
प्रमोटर का रिस्क और इंडेम्निटी
इस डील के तहत कंपनी विजय आर. किर्लोस्कर के पक्ष में एक इंडेम्निटी डीड (Indemnity Deed) साइन करेगी। इसका मतलब यह है कि बैंक गारंटी के कारण प्रमोटर को जो भी व्यक्तिगत जोखिम होगा, कंपनी उसकी भरपाई करेगी।
गवर्नेंस और निवेश पर असर
हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि 26 अक्टूबर, 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में ऑडिट कमेटी की सिफारिशों के बाद ही इसे मंजूरी दी गई है, लेकिन निवेशकों के लिए यह स्थिति समझने वाली है। ग्रुप कंपनियों की संपत्ति और प्रमोटर की गारंटी का इस्तेमाल यह दिखाता है कि कंपनी को वर्किंग कैपिटल (Working Capital) के लिए किस तरह के रिसोर्सेज जुटाने पड़ रहे हैं।
निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे कंपनी की इंटर-कंपनी निर्भरता पर नजर रखें, क्योंकि ओवरड्राफ्ट पूरी तरह से संबंधित संस्थाओं की कोलैटरल (Collateral) पर निर्भर है।
