Kinetic Trust ₹6.6 करोड़ जुटाने के लिए खास योजना बना रही है। कंपनी वॉरंट्स (Warrants) के जरिए यह फंड जुटाएगी ताकि RBI की ₹10 करोड़ नेट ओन्ड फंड (Net Owned Fund) की शर्त पूरी हो सके। इस कदम से प्रमोटरों की हिस्सेदारी कम होगी, लेकिन कंपनी नियमों के दायरे में बनी रहेगी।
Kinetic Trust के फंड जुटाने की योजना
Kinetic Trust लिमिटेड ने अपने ऑथोराइज्ड शेयर कैपिटल (Authorized Share Capital) को ₹5.5 करोड़ से बढ़ाकर ₹10 करोड़ करने का प्रस्ताव दिया है। इसके साथ ही, कंपनी 11 रुपये प्रति वॉरंट के भाव पर 60,00,000 (60 लाख) वॉरंट जारी करेगी, जिससे कुल ₹6.60 करोड़ जुटाए जाएंगे।
कंपनी ने क्यों उठाया ये कदम?
यह फंड जुटाने का मुख्य उद्देश्य कंपनी के नेट ओन्ड फंड (NOF) को बढ़ाना है, ताकि वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ₹10 करोड़ की न्यूनतम आवश्यकता को 31 मार्च, 2027 तक पूरा कर सके। इस पैसे का इस्तेमाल सामान्य वर्किंग कैपिटल (Working Capital) के लिए भी किया जाएगा। कंपनी की 34वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 7 अगस्त, 2026 को होगी, जहां शेयरहोल्डर इस प्रेफरेंशियल इश्यू (Preferential Issue) पर वोट करेंगे।
प्रमोटरों की हिस्सेदारी पर असर
इस इश्यू के सफल होने और वॉरंट्स के इक्विटी शेयर्स में बदलने के बाद, Kinetic Trust का ऑथोराइज्ड कैपिटल ₹10 करोड़ हो जाएगा। वहीं, कंपनी के कुल इक्विटी शेयर्स की संख्या 33,60,000 से बढ़कर 93,60,000 हो जाएगी। इसके कारण प्रमोटरों की हिस्सेदारी 71.43% से घटकर 25.64% रह जाएगी।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम अपनी इक्विटी हिस्सेदारी में भारी कमी (Dilution) का है। कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वॉरंट्स का सफल रूपांतरण हो और वह 2027 तक RBI की नोमर्�� (Norms) को पूरा करती रहे।
