Karnavati Finance ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का रेवेन्यू उछलकर **₹5.31 करोड़** पर पहुंच गया है, लेकिन तेजी से किए गए विस्तार के कारण कंपनी का घाटा बढ़कर **₹5.90 करोड़** हो गया है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का विश्लेषण
कंपनी ने इस साल जबरदस्त ग्रोथ दिखाई है, जहां रेवेन्यू पिछले साल के ₹1.57 करोड़ से 237.6% बढ़कर ₹5.31 करोड़ हो गया है। हालांकि, बॉटम-लाइन पर दबाव के कारण कंपनी ने कोई डिविडेंड (Dividend) घोषित नहीं किया है। घाटा पिछले साल के ₹1.68 करोड़ से बढ़कर ₹5.90 करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है।
क्यों बढ़ी चिंता?
कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को आक्रामक तरीके से ₹65.26 करोड़ तक पहुंचाया है, जिसमें लोन बुक (AUM) ₹64.75 करोड़ है। लेकिन इस ग्रोथ के पीछे अनसेक्योर्ड बॉरोइंग (Unsecured Borrowings) का बड़ा हाथ है, जो ₹11.09 करोड़ से उछलकर ₹59.90 करोड़ हो गई है। बढ़ता कर्ज और बढ़ता घाटा कंपनी के ऑपरेशंस पर भारी दबाव बना रहा है।
रेगुलेटरी चुनौतियां
ऑडिट रिपोर्ट में कई गंभीर अनुपालन (Compliance) खामियां सामने आई हैं:
- BSE द्वारा शेयरहोल्डिंग डेटा देरी से जमा करने पर जुर्माना लगाया गया।
- वेबसाइट के काम न करने पर एक्सचेंज ने याद दिलाया।
- ग्राहकों का KYC डेटा CKYCR पर अपलोड करने में विफलता।
- RBI की अनिवार्य DNBS रिटर्न जमा करने में देरी।
आगे की राह
मैनेजमेंट का कहना है कि ये खर्च शुरुआती विस्तार के कारण हैं और वे NPA को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रहे हैं। निवेशकों को अब इस पर नजर रखनी होगी कि क्या कंपनी अपनी कॉर्पोरेट गवर्नेंस और मुनाफे में सुधार कर पाती है या नहीं।
