Jhandewalas Foods का FY26 रेवेन्यू दोगुना होकर ₹175.83 करोड़ हो गया है। लेकिन कंपनी दिवालियापन की कार्यवाही, संपत्ति के मालिकाना हक पर ऑडिटर की चिंता और लगातार कर्ज डिफॉल्ट जैसे बड़े जोखिमों का सामना कर रही है।
Jhandewalas Foods: रेवेन्यू में 103% की उछाल, लेकिन दिवालियापन और कानूनी जोखिमों का मंडराता साया
कुल आय: ₹175.83 करोड़ (FY26) बनाम ₹86.64 करोड़ (FY25)
PAT (मुनाफा): ₹6.25 करोड़ (FY26) बनाम ₹5.92 करोड़ (FY25)
निवेशकों के लिए खास: रेवेन्यू ग्रोथ का ऑपरेशनल मोमेंटम, कंपनी के गवर्नेंस और सॉल्वेंसी (दिवालियापन) के गंभीर जोखिमों के आगे फीका पड़ता दिख रहा है।
क्या हुआ?
Jhandewalas Foods Ltd ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अपनी कुल आय में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की है। यह पिछले साल के ₹86.64 करोड़ की तुलना में दोगुना से भी ज़्यादा होकर ₹175.83 करोड़ पर पहुंच गई। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) भी मामूली बढ़कर ₹6.25 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹5.92 करोड़ था। लेकिन इस ऑपरेशनल ग्रोथ के बावजूद, कंपनी की फाइलिंग में कई गंभीर जोखिमों का खुलासा हुआ है।
यह क्यों मायने रखता है?
रेवेन्यू में आई यह तेज बढ़ोतरी कंपनी के विस्तार का संकेत देती है, लेकिन यह उन गंभीर चिंताओं से ढक गई है जो कंपनी के भविष्य के लिए एक बड़ा अनिश्चितता पैदा करती हैं। इनमें दिवालियापन की चल रही कार्यवाही, संपत्ति के मालिकाना हक को लेकर ऑडिटर की आपत्तिजनक राय और सालों से चले आ रहे कर्ज के डिफॉल्ट शामिल हैं।
पूरी कहानी
Jhandewalas Foods नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के आदेश के बाद कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेज़ोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) से गुज़र रही है। हालांकि कंपनी ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) में अपील की है और स्टे (रोक) हासिल कर ली है, लेकिन मामला अभी विचाराधीन है। कंपनी एक्सिस बैंक (Axis Bank) और ACME रिसोर्सेज लिमिटेड (ACME Resources Limited) के लोन पर लंबे समय से डिफॉल्ट भी कर रही है।
आगे क्या बदलेगा?
कंपनी जहां 'घी कंपनी' की पहचान से निकलकर एक फूड ग्रुप बनने और अपने 'Naman' ब्रांड का विस्तार करने की योजना बना रही है, वहीं स्टेकहोल्डर्स का तत्काल ध्यान कानूनी कार्यवाही पर रहेगा। कंपनी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन (MOA) में कैटल फीड जैसी नई व्यावसायिक गतिविधियों को शामिल करने के लिए बदलाव किए जा रहे हैं।
जोखिम जिन पर नज़र रखें
मुख्य जोखिमों में NCLT की दिवालियापन की कार्यवाही, ₹5.76 करोड़ की अचल संपत्तियों (कुल फिक्स्ड एसेट्स ₹8.41 करोड़ में से) के टाइटल डीड्स पर ऑडिटर की राय, और ₹6.21 करोड़ के लोन पर लगातार डिफॉल्ट शामिल हैं। इसके अलावा, निवेशकों को संबंधित पार्टियों के साथ बड़े लेन-देन पर भी बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत होगी।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को NCLAT के CIRP अपील पर अंतिम फैसले, टाइटल डीड्स के बिना संपत्तियों के मालिकाना हक के समाधान, और कंपनी की कर्ज की जिम्मेदारियों व संबंधित पार्टियों के साथ लेन-देन को संभालने की क्षमता पर बारीकी से नज़र रखनी चाहिए।
