इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने अपने आने वाले AGM में शेयरधारकों से ₹5,000 करोड़ तक की पूंजी जुटाने की मंजूरी मांगी है। इसके साथ ही, बैंक अपनी शेयर प्रीमियम अकाउंट का इस्तेमाल करके जमा हुए नुकसान की भरपाई करने और कर्मचारियों के लिए नए शेयर जारी करने की भी योजना बना रहा है। बैंक के MD & CEO का कार्यकाल भी बढ़ाया गया है।
IOB की बड़ी योजनाएं
इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) ने अपनी 26वीं सालाना आम बैठक (AGM) के लिए कई अहम प्रस्ताव रखे हैं। इनमें फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफर (FPO), राइट्स इश्यू (Rights Issue), और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) जैसे जरियों से ₹5,000 करोड़ तक की पूंजी जुटाने की योजना शामिल है। इसके अलावा, बैंक ₹8,733.34 करोड़ (31 मार्च, 2026 तक) के अपने जमा हुए नुकसान को शेयर प्रीमियम अकाउंट का उपयोग करके ऑफसेट (भरपाई) करने का इरादा रखता है। साथ ही, IOB अपने कर्मचारियों के लिए IOB-ESPS 2026-27 स्कीम के तहत 10 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करने की भी योजना बना रहा है। प्रबंध निदेशक (MD) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), श्री अजय कुमार श्रीवास्तव का कार्यकाल भी अक्टूबर 2027 तक बढ़ा दिया गया है।
यह क्यों मायने रखता है?
यह प्रस्तावित पूंजी जुटाना IOB के लिए बेसल III पूंजी पर्याप्तता (Basel III capital adequacy) की जरूरतों को पूरा करने और वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपनी विकास योजनाओं को गति देने के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। शेयर प्रीमियम अकाउंट के खिलाफ जमा हुए नुकसान को ऑफसेट करना एक अकाउंटिंग प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य बैंक की नेट वर्थ (Net Worth) को प्रभावित किए बिना एक स्पष्ट वित्तीय तस्वीर पेश करना है। MD & CEO के कार्यकाल का विस्तार बैंक के सुधार (turnaround) के दौर में नेतृत्व स्थिरता सुनिश्चित करेगा।
आगे क्या?
शेयरधारक AGM में इन प्रस्तावों पर मतदान करेंगे। यदि ये मंजूर हो जाते हैं, तो बैंक के पास बड़ी पूंजी जुटाने और अपनी बैलेंस शीट (Balance Sheet) को बेहतर बनाने का एक स्पष्ट रास्ता होगा। ESPS स्कीम के तहत नए शेयर जारी करने का काम भी मंजूरी के अधीन आगे बढ़ेगा।
जोखिम
पूंजी जुटाने की सफलता और समय-सीमा काफी हद तक बाजार की स्थितियों पर निर्भर करेगी। प्रस्तावित योजनाओं से किसी भी महत्वपूर्ण विचलन या बाजार की नकारात्मक प्रतिक्रिया से बैंक को वांछित धन जुटाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अहम आंकड़े
- पूंजी जुटाने का लक्ष्य: वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹5,000 करोड़ तक।
- ऑफसेट किए जाने वाले जमा हुए नुकसान: ₹8,733.34 करोड़ (31 मार्च, 2026 तक)।
- कर्मचारी स्टॉक विकल्प: IOB-ESPS 2026-27 के तहत 10 करोड़ नए इक्विटी शेयर तक।
- MD & CEO का कार्यकाल विस्तार: 8 अक्टूबर, 2027 तक।
