भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2026 की इंस्पेक्शन रिपोर्ट में Indian Overseas Bank के रिस्क-वेटेड एसेट (RWA) कैलकुलेशन में कुछ खामियां सामने आई हैं, लेकिन बैंक ने साफ किया है कि इसका उसके नेट प्रॉफिट पर कोई असर नहीं पड़ेगा और कैपिटल रेश्यो अभी भी काफी मजबूत है।
RBI इंस्पेक्शन का असर
RBI की इंस्पेक्शन फॉर सुपरवाइजरी इवैल्यूएशन (ISE) 2026 के बाद बैंक के रिस्क-वेटेड एसेट्स (RWA) में बढ़ोतरी हुई है। बैंक का अनुमान ₹1,97,931.60 करोड़ का था, जिसे RBI ने बढ़ाकर ₹2,05,323.69 करोड़ कर दिया है। इसके चलते टोटल CRAR अब बैंक के अनुमानित 19.78% के बजाय 19.06% आंका गया है।
क्यों हुआ यह बदलाव?
RBI ने जांच के दौरान पाया कि कॉरपोरेट ECB लोन, विदेशी बैंकों से जुड़े एक्सपोजर और कोर बैंकिंग सॉल्यूशन में दर्ज न हो पाने वाली कुछ एंट्रीज के रिस्क-वेट कैलकुलेशन में तकनीकी गैप थे। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इन तकनीकी बदलावों का बैंक के पिछले फाइनेंशियल ईयर के नेट प्रॉफिट पर कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है।
बैंक का कैपिटल बफर
बैंक की वित्तीय मजबूती की बात करें तो स्थिति काफी संतोषजनक है। RBI द्वारा किए गए असेसमेंट के बाद भी बैंक का CET1 CRAR 16.32% और टोटल CRAR 19.06% बना हुआ है। यह रेगुलेटरी सीमा (CET1 के लिए 5.50% और टोटल के लिए 11.50%) से काफी ज्यादा है, जो दर्शाता है कि बैंक के पास पर्याप्त कैपिटल बफर मौजूद है।
आगे की रणनीति
Indian Overseas Bank ने स्पष्ट किया है कि उसने इन बदलावों को 30 सितंबर, 2026 तक की तिमाही के लिए RWA और CRAR की गणना में पहले ही शामिल कर लिया है। फिलहाल, बैंक अपने ऑपरेशंस को निर्धारित कैपिटल एडिक्वेसी पैरामीटर्स के भीतर मजबूती से चला रहा है।
