Indian Overseas Bank (IOB) का मुनाफा ₹1,659 करोड़ के पार, NPA में बड़ी गिरावट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Overseas Bank (IOB) का मुनाफा ₹1,659 करोड़ के पार, NPA में बड़ी गिरावट

Indian Overseas Bank (IOB) के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। बैंक ने जून 2026 तिमाही में ₹1,659.24 करोड़ का शानदार स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। वहीं, बैंक के ग्रॉस NPA में भी कमी आई है और यह 1.33% पर आ गया है।

IOB की Q1 FY27 की शानदार परफॉरमेंस

बैंक ने जून 30, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹1,659.24 करोड़ का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट घोषित किया है। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा ₹1,111.04 करोड़ था, जो कि एक बड़ी बढ़ोतरी दर्शाता है। वहीं, कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट भी ₹1,178.45 करोड़ से बढ़कर ₹1,716.29 करोड़ हो गया है।

संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार

बैंक की एसेट क्वालिटी में भी खास सुधार देखने को मिला है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) में पिछले साल के 1.97% की तुलना में कमी आई है और यह अब 1.33% पर है। नेट NPA भी 0.32% से घटकर 0.18% हो गया है। बैंक का प्रोविजन कवरेज रेशियो 97.67% पर मजबूत बना हुआ है।

क्यों है यह अहम?

मुनाफे में यह मजबूत बढ़ोतरी और एसेट क्वालिटी में सुधार IOB की वित्तीय स्थिति को और बेहतर बना रहा है। बैंक ने ₹8,733.34 करोड़ के एक्युमुलेटेड लॉसेज (संचित नुकसान) को शेयर प्रीमियम अकाउंट के अगेंस्ट एडजस्ट किया है, जिससे बैंक की बैलेंस शीट मजबूत हुई है और निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। कम NPA का मतलब है कम जोखिम और बेहतर प्रॉफिटेबिलिटी।

पिछला बैकग्राउंड

पहले IOB को काफी नुकसान का सामना करना पड़ा था। इन नुकसानों को शेयर प्रीमियम अकाउंट के अगेंस्ट एडजस्ट करना एक साफ-सुथरी वित्तीय तस्वीर पेश करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बैंक ने अपने इन्वेस्टमेंट फ्लक्चुएशन रिजर्व (IFR) को भी बंद कर दिया है और ₹490 करोड़ को रेवेन्यू रिजर्व में ट्रांसफर कर दिया है।

आगे क्या बदलेगा?

बैलेंस शीट की इस सफाई से बैंक की वित्तीय कहानी में सुधार की उम्मीद है। मैनेजमेंट द्वारा प्रमिसेस (परिसर) की यूजफुल लाइफ और डेप्रिसिएशन मेथड्स (मूल्यह्रास विधियों) में किए गए बदलाव भविष्य के खर्चों और प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित करेंगे। नेट डेफर्ड टैक्स एसेट्स की रियलाइजेबिलिटी पर मैनेजमेंट की राय भी एक सकारात्मक संकेत है।

जोखिम जिन पर नजर

सबसे बड़ा जोखिम ₹6,517.11 करोड़ की विवादित टैक्स डिमांड्स हैं (जिसमें ₹4,631.56 करोड़ इनकम टैक्स, ₹277.80 करोड़ सर्विस टैक्स और ₹1,607.76 करोड़ GST शामिल हैं)। मैनेजमेंट का मानना है कि ये डिमांड्स सस्टेनेबल नहीं हैं और बैंक ने इसके लिए कोई प्रोविजन नहीं किया है, लेकिन ये कानूनी मामले अभी भी एक महत्वपूर्ण कंटिंजेंट लायबिलिटी (आकस्मिक देनदारी) बने हुए हैं।

पीयर कम्पेरिजन (सहकर्मी तुलना)

हालांकि, फाइलिंग में इसी तिमाही के लिए स्पेसिफिक पीयर डेटा नहीं दिया गया है, लेकिन पब्लिक सेक्टर बैंक के लिए IOB का 1.33% ग्रॉस NPA आमतौर पर हेल्दी माना जाता है। एसेट क्वालिटी में सुधार का ट्रेंड पूरे बैंकिंग सेक्टर में सकारात्मक है।

प्रासंगिक मेट्रिक्स (समय-आधारित)

Q1 FY27 के लिए टोटल इनकम (स्टैंडअलोन) ₹10,937.80 करोड़ रही, जो Q1 FY26 के ₹8,866.47 करोड़ से अधिक है।

आगे क्या ट्रैक करें?

निवेशक विवादित टैक्स डिमांड्स के समाधान पर बारीकी से नजर रखेंगे। भविष्य की तिमाहियों में सस्टेनेबल लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी में निरंतर सुधार भी अहम कारक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.