RBI की सुपरवाइजरी रिपोर्ट के बाद Indian Bank ने अपने रिस्क-वेटेड एसेट्स (RWA) और कैपिटल एडिक्वेसी रेश्यो को अपडेट किया है। बैंक ने स्पष्ट किया है कि इससे FY2026 के मुनाफे पर कोई आंच नहीं आएगी।
RBI की समीक्षा और बदलाव
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मार्च 2026 तक की सुपरवाइजरी इवैल्यूएशन रिपोर्ट के बाद Indian Bank ने अपने आंकड़ों में बड़े सुधार किए हैं। रेगुलेटर ने प्रोविजनिंग क्लासिफिकेशन और टियर-2 कैपिटल कैलकुलेशन में कुछ खामियां पकड़ी थीं।
प्रमुख बदलाव और आंकड़े
RBI की जांच के बाद बैंक का क्रेडिट रिस्क-वेटेड एसेट (RWA) बढ़कर ₹3,98,512 करोड़ हो गया है। इसके चलते बैंक के प्रमुख रेश्यो में निम्नलिखित बदलाव देखे गए हैं:
- Total CRAR: अब 16.53% है, जो पहले 17.93% था।
- CET-1 Ratio: अब 15.61% पर है, जो पहले 16.40% था।
बैंक ने यह भी बताया कि उसने ₹3,823 करोड़ का प्रोविजनिंग अंतर और ₹2,470 करोड़ की गलत टियर-2 कैपिटल कैटेगरी को दुरुस्त कर लिया है। साथ ही, क्रेडिट कन्वर्जन फैक्टर (CCF) की गलती के कारण RWA में ₹22,079 करोड़ का अंडरएस्टिमेशन भी ठीक किया गया है।
निवेशकों के लिए राहत की बात
बैंक मैनेजमेंट ने साफ किया है कि इन तकनीकी बदलावों का असर कंपनी के FY2026 के नेट प्रॉफिट पर बिल्कुल नहीं पड़ेगा। साथ ही, बैंक का मौजूदा कैपिटल लेवल RBI के तय किए गए रेगुलेटरी मिनिमम से काफी ऊपर है, जिससे बैंक की वित्तीय स्थिति पूरी तरह सुरक्षित है। यह अपडेटेड आंकड़े सितंबर 2026 की तिमाही रिपोर्ट में पहले ही शामिल किए जा चुके हैं।
