Indian Bank ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO में अपनी हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। बैंक 'ऑफर फॉर सेल' (OFS) के जरिए **15 लाख** शेयर बाजार में उतारेगा, जो उसकी कुल होल्डिंग में **17.91%** की कटौती है।
नॉन-कोर एसेट से कमाई की रणनीति
Indian Bank ने आधिकारिक तौर पर सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं कि वह NSE के आगामी IPO में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। बैंक अपनी नॉन-कोर होल्डिंग्स को कम करने और लिक्विडिटी जुटाने के लिए 15,00,000 शेयरों को OFS रूट के जरिए बेचेगा। यह प्रक्रिया सितंबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है, बशर्ते इसे जरूरी रेगुलेटरी मंजूरी मिल जाए।
बैंक की बैलेंस शीट पर असर
यह निवेश बैंक के लिए काफी फायदेमंद साबित हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान, इसी हिस्सेदारी से बैंक ने ₹29.31 करोड़ का डिविडेंड (Dividend) कमाया था। अब बैंक इस स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट को भुनाकर अपनी पूंजी को अनलॉक करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, बैंक को कितनी रकम मिलेगी, यह पूरी तरह से IPO के समय तय होने वाली कीमत (Price Discovery) पर निर्भर करेगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
हालांकि यह कदम बैंक की बैलेंस शीट को मजबूत करेगा, लेकिन निवेशकों को मार्केट की अस्थिरता पर नजर रखनी चाहिए। IPO की सफलता और रेगुलेटरी क्लीयरेंस में देरी से पूरी प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है। बाजार के जानकारों का मानना है कि निवेशकों को अंतिम ऑफर प्राइस और बिक्री के बाद मिलने वाली कुल राशि पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
