Indiabulls Limited को RBI से 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) के तौर पर रजिस्ट्रेशन मिल गया है। हालांकि, कंपनी ने इसे स्वीकार करने के बजाय इसकी जरूरत पर विचार करने की बात कही है और जरूरत पड़ने पर इसे वापस लौटाने का विकल्प भी खुला रखा है।
आरबीआई (RBI) से मिली मंजूरी और कंपनी का रुख
Indiabulls Limited ने शेयर बाजारों को दी गई अपनी सूचना में बताया है कि उसे आरबीआई से कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में काम करने के लिए सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन मिल गया है। यह रेगुलेटरी बदलाव 2 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी है।
क्यों है यह मामला चर्चा में?
आमतौर पर किसी कंपनी के लिए आरबीआई से ऐसा लाइसेंस मिलना एक बड़ी उपलब्धि होती है, क्योंकि यह कंपनी के निवेश और सहायक कंपनियों को मैनेज करने के ढांचे को स्पष्ट करता है। लेकिन, मैनेजमेंट का रुख यहाँ काफी सतर्क है। कंपनी ने साफ किया है कि फिलहाल यह लाइसेंस उनके लिए कितना जरूरी है, इस पर इंटरनल रिव्यू चल रहा है।
आगे क्या होगा?
बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि यह रजिस्ट्रेशन कंपनी के मौजूदा बिजनेस मॉडल के लिए सही नहीं है, तो वे इसे वापस (सरेंडर) करने में भी पीछे नहीं हटेंगे।
निवेशकों के लिए संकेत
निवेशकों को अब आगे की फाइलिंग्स पर पैनी नजर रखनी चाहिए। कंपनी का फैसला कि वह इस सर्टिफिकेट को रखेगी या लौटा देगी, आने वाले समय में उसके कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी और कैपिटल एलोकेशन पर बड़ा असर डालेगा।
