Indiabulls Ltd के लिए राहत की खबर आई है। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसके **₹8,267.86 करोड़** के सभी लोन ब्याज सहित पूरी तरह चुका दिए गए हैं। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है, जिससे कंपनी को बड़ी राहत मिली है।
EOW की रिपोर्ट ने Indiabulls को दी क्लीन चिट
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है। यह रिपोर्ट सिटीजन्स व्हिसलब्लोअर फोरम द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) से संबंधित है। EOW की फाइंडिंग्स Indiabulls Ltd के दावों की पुष्टि करती हैं कि कंपनी की उधारी गतिविधियां वैध थीं और सभी देनदारियों का भुगतान कर दिया गया है।
क्यों है यह खबर अहम?
यह रिपोर्ट इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें साफ किया गया है कि कुल 197 लोन अकाउंट, जिनमें पांच कर्जदार समूह शामिल थे और कुल सैंक्शन राशि ₹8,267.86 करोड़ थी, उन्हें ब्याज सहित पूरी तरह से चुका दिया गया है। चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म M/s N.D. Kapur & Co. ने इसका सर्टिफ़िकेट भी जारी किया है। EOW की जांच, जिसे SEBI और नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) ने भी रिव्यू किया है, के अनुसार कंपनी को कोई वित्तीय नुकसान नहीं हुआ है।
जानिए पूरा मामला
PIL में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई गई थी। हालांकि, EOW की रिपोर्ट, जो SEBI और NHB की समीक्षाओं पर आधारित है, ने निष्कर्ष निकाला कि लोन के वितरण और पुनर्भुगतान का हिसाब ठीक से रखा गया था और फंड डायवर्जन का कोई सबूत नहीं मिला। 'क्विड प्रो क्वो' (quid pro quo) निवेश के आरोपों को भी खारिज कर दिया गया है, क्योंकि रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेश उधार लेने से पहले हुआ था और इसके संबंध का कोई सबूत नहीं है।
अब आगे क्या?
यह डेवलपमेंट रेगुलेटरी क्लैरिटी प्रदान करता है और शेयरधारकों के लिए एक बड़ा डर खत्म करता है। कंपनी को लोन डायवर्जन और 'क्विड प्रो क्वो' व्यवस्थाओं से संबंधित प्रमुख आरोपों से बरी कर दिया गया है। Indiabulls Ltd खुद PIL में पक्षकार नहीं है; यह मामला पूर्व प्रमोटर से संबंधित है।
किन जोखिमों पर नज़र रखें
हालांकि कंपनी को राहत मिली है, रिलायंस ADAG ग्रुप से संबंधित जांच अभी भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट भविष्य में PIL के बाकी बिंदुओं पर सुनवाई करेगा।
गवर्नेंस की स्थिति
रिपोर्ट में बताया गया है कि लोन को कंपनी की क्रेडिट कमेटी द्वारा मंजूरी दी गई थी, जिसमें एग्जीक्यूटिव शामिल थे और जिसकी अध्यक्षता CEO करते थे। पूर्व प्रमोटर श्री समीर गहलोत इस कमेटी का हिस्सा नहीं थे और लोन की मंजूरी में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। वह 2023 में प्रमोटर नहीं रहे।
महत्वपूर्ण आंकड़े
- कुल सैंक्शन लोन: ₹8,267.86 करोड़
- कुल वसूली (चुकाया गया): ₹11,073.77 करोड़
- कुल लोन अकाउंट: 197
आगे क्या देखें
निवेशक PIL के बाकी बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और रिलायंस ADAG ग्रुप की जांच पर किसी भी अपडेट पर बारीकी से नजर रखेंगे।
