Ind Bank Housing Ltd ने चालू फाइनेंशियल ईयर की दूसरी तिमाही में **₹0.01 करोड़** का नेट लॉस दर्ज किया है। RBI द्वारा रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने के बाद से कंपनी वाइंडिंग-अप (Winding-up) की प्रक्रिया से गुजर रही है और अब केवल संपत्ति वसूली (Asset recovery) पर केंद्रित है।
मुनाफे से घाटे की ओर
Ind Bank Housing ने सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही के लिए अपने फाइनेंशियल रिजल्ट्स जारी किए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में ₹0.01 करोड़ का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, जबकि छमाही के दौरान कंपनी को ₹3.87 करोड़ का नेट प्रॉफिट हुआ था। कंपनी के कामकाज में अब कोई विस्तार नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया एसेट रिकवरी और गिरवी रखी संपत्तियों को बेचने तक सीमित है।
ऑपरेशंस और रेगुलेटरी अपडेट्स
RBI ने 22 सितंबर 2023 को ही कंपनी का हाउसिंग फाइनेंस रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया था, जिसके बाद से ही कंपनी वाइंडिंग-अप की औपचारिक प्रक्रिया में है। बोर्ड ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) के निर्देशों का पालन करते हुए M/s Ray & Ray को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए सांविधिक लेखा परीक्षक (Statutory Auditor) नियुक्त किया है।
निवेशकों के लिए जोखिम
कंपनी की बैलेंस शीट बेहद तनावपूर्ण है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी की इक्विटी नेगेटिव (₹117.09 करोड़) बनी हुई है। ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से 'गोइंग कंसर्न' (Going concern) को लेकर गंभीर अनिश्चितताएं जताई हैं।
आगे क्या रखें ध्यान?
शेयरधारकों को अब केवल कानूनी कार्यवाही और संपत्तियों की वसूली से जुड़ी अपडेट्स पर नजर रखनी चाहिए। रिकवरी फंड के वितरण या रेगुलेटरी संस्थाओं की ओर से आने वाला कोई भी नया निर्देश कंपनी के भविष्य के लिए निर्णायक साबित होगा।
