IRFC ने **FY27** तक अपने एसेट अंडर मैनेजमेंट (**AUM**) को **₹5,00,000 करोड़** तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। कंपनी अब अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करते हुए रेलवे के अलावा मेट्रो, पोर्ट और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे हाई-मार्जिन प्रोजेक्ट्स में भी निवेश करेगी।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और ग्रोथ
कंपनी के हालिया नतीजों पर नजर डालें तो H1 में IRFC का नेट प्रॉफिट (PAT) ₹3,800 करोड़ के पार निकल गया है, जो कि सालाना आधार पर 10% की ग्रोथ है। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 20% बढ़ा है, जो इसके विस्तार की कहानी बयां कर रहा है।
पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव
मैनेजमेंट अब तक केवल रेलवे फाइनेंसिंग पर निर्भर था, लेकिन अब कंपनी 2030 तक अपने एसेट पोर्टफोलियो को 60:40 (रेलवे बनाम नॉन-रेलवे) के अनुपात में ढालने की तैयारी में है।
- मुनाफे का गणित: पारंपरिक रेलवे बिजनेस का मार्जिन महज 1.3% के आसपास रहता है, जबकि नॉन-रेलवे प्रोजेक्ट्स से मिलने वाला मार्जिन 2 गुना से 3.5 गुना तक अधिक हो सकता है।
- कॉम्पिटिटिव एज: कंपनी ने अपनी WACC (Weighted Average Cost of Capital) को 6.55% पर स्थिर रखा है, जो इसे बाजार में एक मजबूत स्थिति प्रदान करता है।
निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत
हालांकि यह रणनीति मुनाफे के लिहाज से शानदार दिखती है, लेकिन भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी नए प्रोजेक्ट्स का डिस्बर्समेंट (Disbursement) कितनी तेजी से करती है। रेलवे के अलावा अन्य इंफ्रा प्रोजेक्ट्स में जोखिम प्रबंधन (Credit Risk Management) पर निवेशकों की नजर रखनी होगी, क्योंकि यह मॉडल रेलवे की तुलना में अधिक जटिल है।
