IRFC में बड़े फेरबदल: नए डायरेक्टर (फाइनेंस) और CFO नियुक्त, अनुभव का खजाना लेकर आए

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AuthorNeha Patil|Published at:
IRFC में बड़े फेरबदल: नए डायरेक्टर (फाइनेंस) और CFO नियुक्त, अनुभव का खजाना लेकर आए

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IRFC) ने डॉ. रंजन चौधरी को डायरेक्टर (फाइनेंस) और मिस दीपा कोटनीस को चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पद पर नियुक्त किया है। दोनों सार्वजनिक वित्त और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग में दशकों का अनुभव रखते हैं।

IRFC में बड़े ओहदों पर नियुक्ति

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IRFC) ने अपने सीनियर मैनेजमेंट में महत्वपूर्ण बदलावों की घोषणा की है। कंपनी ने डायरेक्टर (फाइनेंस) और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) के पदों पर नई नियुक्तियां की हैं, जो 30 जून, 2026 से प्रभावी होंगी।

क्या हुआ?

डॉ. रंजन चौधरी को पांच साल के कार्यकाल के लिए डायरेक्टर (फाइनेंस) नियुक्त किया गया है। उन्होंने यह जिम्मेदारी श्री रणधीर सहाय से ली है, जो यह पद अतिरिक्त तौर पर संभाल रहे थे। इसी तरह, मिस दीपा कोटनीस को चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) और की मैनेजरियल पर्सन (KMP) नियुक्त किया गया है, जो श्री रणधीर सहाय के अतिरिक्त कार्यभार से यह पद संभालेंगी।

क्यों महत्वपूर्ण है ये बदलाव?

इन नियुक्तियों से IRFC के फाइनेंशियल मैनेजमेंट को मजबूती मिलेगी। डॉ. चौधरी और मिस कोटनीस दोनों ही सार्वजनिक वित्त (public finance) और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग (infrastructure funding) के क्षेत्र में गहरा अनुभव रखते हैं। इस बदलाव का उद्देश्य कंपनी के वित्तीय प्रबंधन और रणनीतिक दिशा को और मजबूत करना है।

बैकस्टोरी: कौन हैं नए चेहरे?

डॉ. चौधरी के पास 29 साल से अधिक का अनुभव है। वह पहले पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) में चीफ जनरल मैनेजर (एंटिटी अप्रेल) के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने फाइनेंस में पीएचडी की है और वे क्वालिफाइड कॉस्ट अकाउंटेंट भी हैं।

वहीं, मिस कोटनीस इंडियन रेलवे अकाउंट्स सर्विस (IRAS) की अधिकारी हैं और उनके पास सार्वजनिक वित्त और इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग में 27 साल से अधिक का अनुभव है। इससे पहले, वह IRFC में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (फाइनेंस) के तौर पर काम कर चुकी हैं।

आगे क्या?

ये नियुक्तियां 30 जून, 2026 से प्रभावी होंगी। डॉ. चौधरी डायरेक्टर (फाइनेंस) के रूप में पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। यह भी बताया गया है कि 30 जून, 2026 तक दोनों व्यक्तियों के पास कंपनी के सीमित शेयर (equity shares) हैं, जो शेयरधारकों के हितों के साथ तालमेल को दर्शाता है।

निवेशकों के लिए खास: नए अनुभवी नेतृत्व से कंपनी के वित्तीय कामकाज में स्थिरता और सुधार की उम्मीद है।

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