IIFL Finance ने जुटाये ₹100 करोड़
IIFL Finance Limited ने ₹100 करोड़ के परपेचुअल, अनसिक्योर्ड, लिस्टेड, रेटेड, नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए सफलतापूर्वक अलॉट कर दिए हैं। इस इंस्ट्रूमेंट सीरीज का नाम PDI-1 2027 है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह कदम IIFL Finance को अपना लॉन्ग-टर्म कैपिटल बेस मजबूत करने में मदद करेगा, जिससे कंपनी की कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (Capital Adequacy Ratio) को बनाए रखने में आसानी होगी। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये इंस्ट्रूमेंट्स 'परपेचुअल' हैं, यानी इनकी कोई तय मैच्योरिटी डेट नहीं होती, और पैसे की वापसी के लिए रेग्युलेटर, यानी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मंजूरी पर निर्भर रहना होगा।
परपेचुअल डेट इंस्ट्रूमेंट्स क्या होते हैं?
ये हाइब्रिड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स होते हैं जिनकी कोई तय मैच्योरिटी डेट नहीं होती। फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस अक्सर इन्हें अपनी कैपिटल स्ट्रक्चर को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
आगे क्या?
कंपनी ने ₹100 करोड़ का लॉन्ग-टर्म फंड जुटा लिया है, जिस पर सालाना 9.90% का कूपन रेट मिलेगा।
जोखिम पर भी डालें नजर
- परपेचुअल नेचर: निश्चित मैच्योरिटी डेट न होने के कारण, प्रिंसिपल अमाउंट की वापसी की गारंटी किसी तय तारीख पर नहीं होती।
- रेग्युलेटरी अप्रूवल: कंपनी 10 साल बाद ही इन डेट्स को रिडीम (Redeem) करने के लिए कॉल ऑप्शन (Call Option) का इस्तेमाल कर सकती है, और वह भी RBI से पहले मंजूरी लेने के बाद ही संभव होगा।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि IIFL Finance इस कैपिटल का इस्तेमाल कैसे करती है और कॉल ऑप्शन के इस्तेमाल व आगामी RBI अप्रूवल को लेकर कंपनी की ओर से क्या घोषणाएं होती हैं।
