IIFL Finance के लिए पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे शानदार रहे हैं। कंपनी ने **₹713 करोड़** का मुनाफा दर्ज किया है, वहीं कंपनी के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में **38%** का जबरदस्त इजाफा हुआ और यह **₹1.15 लाख करोड़** के पार पहुंच गया। कंपनी अब सिक्योर लेंडिंग (secured lending) पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
Detailed Coverage
IIFL Finance के Q1 FY27 के दमदार नतीजे
IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के लिए अपने नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने ₹713 करोड़ का कंसोलिडेटेड प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) दर्ज किया है। वहीं, कंपनी की कंसोलिडेटेड लोन AUM ₹1,15,523 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 38% ज्यादा है।
कंपनी ने 19.5% के एनुअलाइज्ड रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) और 3.1% के रिटर्न ऑन एसेट्स (ROA) के साथ अच्छी परफॉर्मेंस दिखाई है। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) 1.6% पर बने हुए हैं, जबकि नेट NPA 0.8% दर्ज किए गए हैं।
क्यों है ये नतीजे अहम?
ये नतीजे IIFL Finance के लिए ऑपरेशनल स्थिरता की ओर एक मजबूत कदम दर्शाते हैं। होम लोन और गोल्ड लोन जैसे सिक्योर लेंडिंग प्रोडक्ट्स में मजबूत AUM ग्रोथ इस बात का सबूत है कि कंपनी का मार्केट में अच्छा प्रदर्शन जारी है। कंपनी अब अपने पोर्टफोलियो को सिक्योर एसेट्स की ओर ले जा रही है और असुरक्षित बिज़नेस लोन और पर्सनल लोन को बंद करने का फैसला कर चुकी है। इसका मकसद एसेट क्वालिटी को बेहतर बनाना और जोखिम कम करना है। मैनेजमेंट कैपिटल एडिक्वेसी और ऑपरेटिंग कॉस्ट पर भी काम कर रहा है, जो भविष्य की ग्रोथ के लिए बहुत जरूरी है।
कंपनी की नई रणनीति
IIFL Finance फिलहाल एक बड़े स्ट्रैटेजिक बदलाव से गुजर रही है। कंपनी अब सिक्योर लेंडिंग पर पूरा फोकस कर रही है। इसके अलावा, कंपनी अपनी कैपिटल एडिक्वेसी को मजबूत करने के लिए कई रास्तों पर विचार कर रही है, जिनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), सब्सिडियरी में हिस्सेदारी बेचना और परपेचुअल या सबऑर्डिनेटेड डेट जारी करना शामिल है। कंपनी आने वाले 2-3 सालों में ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने और लागत कम करने के लिए 'प्रोजेक्ट पेस' (Project PACE) नाम का एक AI-led ऑपरेटिंग मॉडल भी लागू कर रही है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को कंपनी की कैपिटल रेजिंग योजनाओं, क्रेडिट कॉस्ट और ऑपरेटिंग एक्सपेंस में कमी और पुराने हाउसिंग फाइनेंस पोर्टफोलियो के समाधान पर नजर रखनी चाहिए। साथ ही, AI-led ऑपरेटिंग मॉडल का सफल इंटीग्रेशन और पुराने पोर्टफोलियो की सफाई भविष्य के प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी। कंपनी पर ₹475 करोड़ का इनकम टैक्स का मामला भी चल रहा है, जिसके खिलाफ अपील की गई है।
