IFCI पर गिरी गाज: NSE और BSE ने लगाया **₹78 लाख** का जुर्माना, जानें मामला

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AuthorNeha Patil|Published at:
IFCI पर गिरी गाज: NSE और BSE ने लगाया **₹78 लाख** का जुर्माना, जानें मामला

सरकारी कंपनी IFCI लिमिटेड पर स्टॉक एक्सचेंजों ने **₹0.78 करोड़** का भारी जुर्माना ठोक दिया है। यह कार्रवाई कंपनी द्वारा बोर्ड में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति से जुड़े SEBI के नियमों का पालन न करने के कारण की गई है।

जुर्माना क्यों लगा?

NSE और BSE ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए यह पेनल्टी लगाई है। कंपनी पर मुख्य आरोप यह है कि उसने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और विभिन्न कमेटियों में इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की संख्या पूरी नहीं की है। साथ ही, बोर्ड में एक महिला इंडिपेंडेंट डायरेक्टर की अनिवार्य नियुक्ति का भी अभाव है, जो SEBI (LODR) के नियमों का उल्लंघन है।

सरकारी कंपनी का पक्ष

IFCI का कहना है कि वे भारत सरकार के अंडरटेकिंग के तौर पर काम करते हैं। कंपनी के अनुसार, डायरेक्टर्स की नियुक्ति पूरी तरह से प्रशासनिक मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में है, न कि कंपनी के इंटरनल बोर्ड के पास। इसी दलील के साथ कंपनी ने एक्सचेंजों से जुर्माने को माफ करने की गुहार लगाई है।

ESG और अन्य रिपोर्टिंग

विवादों के बीच कंपनी ने अपना 'बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट' (BRSR) भी जारी किया है, जिसे M/s. Navneet K Arora & Co LLP द्वारा अश्योरेंस दिया गया है। कंपनी का ऊर्जा खपत 8,951.02 GJ और पानी की खपत 1,528 किलोलीटर रही है।

निवेशकों के लिए जोखिम

गवर्नेंस में यह कमी निवेशकों के लिए एक रेड फ्लैग हो सकती है। जब तक सरकार स्तर पर नियुक्तियां पूरी नहीं होतीं, तब तक कंपनी को रेगुलेटरी दबाव और आगे भी ऐसी पेनल्टीज का सामना करना पड़ सकता है, जो इसके मार्केट सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.