IDFC First Bank को चंडीगढ़ फ्रॉड से ₹676 करोड़ का लगा चूना
IDFC First Bank ने अपनी चंडीगढ़ सेक्टर 32 ब्रांच में हुए धोखाधड़ी मामले का पूरा हिसाब-किताब सामने रख दिया है। बैंक ने इस फ्रॉड के कारण हुए ₹676.19 करोड़ के वित्तीय नुकसान को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है। इसमें ₹645.59 करोड़ की नेट प्रिंसिपल राशि और सरकारी व स्कूल खातों में जमा राशि पर दिए गए ₹30.60 करोड़ के ब्याज का भी समावेश है।
क्या है पूरा मामला?
बैंक ने KPMG द्वारा किए गए फोरेंसिक रिव्यू (प्रोजेक्ट अल्ट्रा) के नतीजों का खुलासा किया है। इस रिव्यू में 1 अक्टूबर 2024 से 28 फरवरी 2026 के बीच 56 खातों की जांच की गई, जिसमें 13 खातों में धोखाधड़ी पाई गई। बैंक ने Q4FY26 के अपने नतीजों में ₹645.59 करोड़ (नेट प्रिंसिपल) और ₹30.60 करोड़ (ब्याज) के कुल वित्तीय प्रभाव को दर्ज किया है।
क्यों है यह अहम?
इस खुलासे से यह साफ हो गया है कि यह नुकसान एक अकेली ब्रांच तक ही सीमित था। बैंक ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नए ऑपरेशनल कंट्रोल्स लागू किए हैं, जिसमें सेंट्रलाइज्ड ओवरसाइट (केंद्रीकृत निगरानी) शामिल है। इससे निवेशकों को बैंक की ऑपरेशनल रिस्क मैनेजमेंट क्षमता पर भरोसा बढ़ेगा।
फ्रॉड की कहानी
इस धोखाधड़ी में कुछ ब्रांच कर्मचारियों, ग्राहकों के कर्मचारियों और बाहरी पक्षों की मिलीभगत थी। यह फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके मैनुअल कंट्रोल्स को बायपास कर किया गया, जबकि बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित रहे। जांच के बाद अब तक 19 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
अब क्या बदलेगा?
IDFC First Bank ने अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, जैसे सेंट्रलाइज्ड टीम ओवरसाइट, बेहतर ग्राहक संचार और टेक्नोलॉजी-आधारित कंट्रोल्स। बैंक ने अपने सरकारी और संस्थागत ग्राहकों से संपर्क करके शेष राशि की पुष्टि की, जिसमें किसी और विसंगति की रिपोर्ट नहीं मिली है।
जोखिम पर नजर
यह मामला फिलहाल विचाराधीन (सब ज्यूडिस) है, यानी यह न्यायिक समीक्षा के अधीन है। लगातार कानूनी और रेगुलेटरी जांच पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। इस घटना ने ब्रांच-लेवल के मैनुअल कंट्रोल्स में पिछली कमजोरियों को भी उजागर किया है, जिन्हें मजबूत करने की जरूरत थी।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशक बैंक के ऑपरेशनल स्थिरता और नए लागू किए गए सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल फ्रेमवर्क की निरंतर प्रभावशीलता पर बारीकी से नजर रखेंगे। कानूनी कार्यवाही और किसी भी अतिरिक्त रेगुलेटरी एक्शन की प्रगति की निगरानी करना भी महत्वपूर्ण होगा।
