ICRA ने IDBI Bank की लॉन्ग-टर्म रेटिंग को 'वॉच विद डेवलपिंग इम्प्लीकेशंस' में डाल दिया है। यह कदम बैंक में **60.72%** हिस्सेदारी की बिक्री के ऐलान के बाद आया है, जिससे अब बैंक का मालिकाना हक सरकार और LIC के हाथों से निकलकर Fairfax Financial की सब्सिडियरी कंपनी के पास जा रहा है।
रेटिंग वॉच का क्या है मतलब?
ICRA ने बैंक की लॉन्ग-टर्म रेटिंग को [ICRA]AA के साथ 'रेटिंग वॉच विद डेवलपिंग इम्प्लीकेशंस' में रखा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक की रेटिंग बढ़ भी सकती है, घट भी सकती है या मौजूदा स्तर पर बनी भी रह सकती है। यह पूरी तरह से डील के फाइनल आउटकम और नए मैनेजमेंट की रणनीतियों पर निर्भर करेगा।
क्यों अहम है यह डील?
सरकार और LIC अपनी 60.72% हिस्सेदारी प्रेम वत्सा की कंपनी Fairfax Financial की सब्सिडियरी '10955230 Canada Inc.' को ₹81 प्रति शेयर के भाव पर बेच रही हैं। इस डील की कुल वैल्यू ₹52,878 करोड़ आंकी गई है। इस बदलाव के बाद, सरकार और LIC की हिस्सेदारी घटकर क्रमशः 15% और 19% रह जाएगी।
आगे की राह और जोखिम
निवेशकों को अब रेगुलेटरी मंजूरियों और टाइमलाइन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। ICRA मुख्य रूप से Fairfax के विजन और बैंक के ऑपरेशनल स्ट्रक्चर पर पड़ने वाले असर की समीक्षा करेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि बैंक के सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (Certificate of Deposit) प्रोग्राम को [ICRA]A1+ रेटिंग के साथ बरकरार रखा गया है, जिससे शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी को लेकर फिलहाल कोई बड़ा रिस्क नहीं दिख रहा है।
