ICICI Lombard General Insurance को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से एक बड़ी खबर मिली है। डिपार्टमेंट ने कंपनी के टैक्स रिफंड में **₹96.96 करोड़** का एडजस्टमेंट किया है। कंपनी का मानना है कि यह एडजस्टमेंट गलत है और वो इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में है।
क्या हुआ है?
ICICI Lombard General Insurance को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर से एक इंटिमेशन (सूचना) मिली है। यह सूचना फाइनेंशियल ईयर (AY) 2025-26 के लिए कंपनी को मिलने वाले टैक्स रिफंड से जुड़ी है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इस रिफंड को फाइनेंशियल ईयर (AY) 2015-16 के री-असेसमेंट ऑर्डर से जुड़े टैक्स डिमांड के अगेंस्ट एडजस्ट कर दिया है। इस तरह एडजस्ट किया गया रिफंड ₹96.96 करोड़ (₹96,96,37,540) है।
यह क्यों मायने रखता है?
यह मामला टैक्स डिस्प्यूट का है, जहां कंपनी को मिलने वाला रिफंड पुराने बकाया के बदले सेट-ऑफ किया जा रहा है। यह रकम काफी बड़ी है, लेकिन कंपनी का मैनेजमेंट इसे गलत मान रहा है। यह बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट्स के लिए टैक्स लिटिगेशन और कंप्लायंस की मुश्किलों को दिखाता है।
पीछे की कहानी
इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 245, रिफंड को टैक्स डिमांड के अगेंस्ट एडजस्ट करने की प्रक्रिया के बारे में बताता है। यह खास एडजस्टमेंट फाइनेंशियल ईयर 2025-26 (रिफंड) और 2015-16 (डिमांड) से जुड़ा है।
अब क्या बदलेगा?
ICICI Lombard इस एडजस्टमेंट को चुनौती देने के लिए कानूनी रास्ते अपनाएगी। इसमें अपील या रिट पिटीशन फाइल करना शामिल हो सकता है। कंपनी का कहना है कि इस एडजस्टमेंट में पहले मिले फेवरेबल ऑर्डर्स को ध्यान में नहीं रखा गया है।
क्या हैं जोखिम?
हालांकि मैनेजमेंट का कहना है कि इस समय कोई बड़ा फाइनेंशियल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इस डिस्प्यूट का नतीजा भविष्य के फाइनेंशियल असेसमेंट को प्रभावित कर सकता है। इन्वेस्टर्स को कानूनी कार्रवाई की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
क्या करें ट्रैक?
इन्वेस्टर्स को ICICI Lombard से इस टैक्स मामले के कानूनी समाधान को लेकर आने वाले अपडेट्स पर ध्यान देना चाहिए।
