ICICI Bank में बड़ा फेरबदल
ICICI Bank लिमिटेड ने अश्विनी भाटिया को अपने बोर्ड में एडिशनल (इंडिपेंडेंट) डायरेक्टर के तौर पर नियुक्त करने का फैसला किया है। यह नियुक्ति 1 जून 2026 से लागू होगी और 31 मई 2031 तक, यानी पूरे 5 साल के लिए प्रभावी रहेगी। इस नियुक्ति को शेयरधारकों की मंजूरी भी मिलनी बाकी है।
क्यों है यह नियुक्ति अहम?
अश्विनी भाटिया के पास फाइनेंशियल मार्केट्स और बैंकिंग सेक्टर में 40 साल से ज़्यादा का अनुभव है। हाल ही में उन्होंने SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) में होल टाइम मेंबर (Whole Time Member) के तौर पर काम किया है। रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और कोर बैंकिंग ऑपरेशंस की गहरी समझ रखने वाले भाटिया की नियुक्ति से बैंक के गवर्नेंस और स्ट्रेटेजिक ओवरसाइट (strategic oversight) को काफी मजबूती मिलने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए यह बोर्ड लेवल पर विशेषज्ञता का बड़ा बूस्ट है।
भाटिया का पिछला सफर
भाटिया का करियर काफी शानदार रहा है। उन्होंने स्टेट बैंक ग्रुप (State Bank Group) में लगभग 37 साल बिताए, जहाँ से वे मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से रिटायर हुए। इसके अलावा, उन्होंने SBI Funds Management Limited के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO का पद भी संभाला। SEBI में अपने हालिया कार्यकाल (जून 2022 से मई 2025) के दौरान, उन्होंने डेट और हाइब्रिड सिक्योरिटीज, AIF, FPI और मार्केट इंटरमीडियरीज रेगुलेशन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की देखरेख की।
आगे क्या?
शेयरधारकों की मंजूरी मिलते ही, भाटिया जून 2026 से ICICI Bank के बोर्ड में एक इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में शामिल हो जाएंगे। उनकी ज़िम्मेदारियों में बैंक के स्ट्रेटेजिक फैसलों में योगदान देना और मजबूत गवर्नेंस प्रैक्टिसेस सुनिश्चित करना शामिल होगा। बैंक ने कन्फर्म किया है कि वह किसी मौजूदा बोर्ड मेंबर के रिश्तेदार नहीं हैं।
जोखिम और आगे का रास्ता
फिलहाल इस गवर्नेंस डेवलपमेंट से कोई बड़ा जोखिम नज़र नहीं आ रहा है। हालांकि, किसी भी बोर्ड अपॉइंटमेंट की तरह, उनके योगदान की प्रभावशीलता समय के साथ ही देखी जाएगी। निवेशकों को भाटिया की नियुक्ति के लिए होने वाली शेयरधारक वोटिंग पर नज़र रखनी चाहिए।
