Hi-Klass Trading and Investment Ltd ने अपनी 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) का ऐलान कर दिया है, जो **28 सितंबर, 2026** को होगी। इस बैठक में कंपनी न केवल अपने ऑडिटर्स बदलने जा रही है, बल्कि एसेट मैनेजमेंट और डिस्ट्रेस्ड डेट सर्विस में उतरने का बड़ा फैसला भी लेगी।
क्या है कंपनी की नई रणनीति?
कंपनी अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। Hi-Klass Trading अब 'मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन' में बदलाव कर रही है ताकि वह एसेट मैनेजमेंट के क्षेत्र में कदम रख सके। इसमें मुख्य रूप से नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) और डिस्ट्रेस्ड डेट की खरीद-बिक्री के साथ-साथ स्ट्रक्चर्ड फाइनेंस और लोन सिंडिकेशन जैसी सेवाएं शामिल होंगी। कंपनी का इरादा अपनी मौजूदा आय के स्रोतों को और विविधता (Diversify) देने का है।
ऑडिटर और फीस में बदलाव
AGM में सबसे बड़ी चर्चा का विषय ऑडिटर्स की नियुक्ति है। कंपनी M/s. S. Jaykishan को नया स्टेट्यूटरी ऑडिटर बनाने जा रही है। इसके लिए तय की गई फीस ₹1.50 लाख प्रति वर्ष है, जो पिछले ऑडिटर (M/s. Biswas Dasgupta Datta & Roy) की फीस ₹60,000 के मुकाबले 150% ज्यादा है। मैनेजमेंट का कहना है कि नए बिजनेस वर्टिकल्स की जटिलताओं को देखते हुए यह बढ़ोतरी जरूरी है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
इस बदलाव के जरिए कंपनी अधिक कैपिटल-इंटेंसिव फाइनेंशियल सर्विसेज की ओर बढ़ रही है। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या यह 'स्पेशल रेजोल्यूशन' आसानी से पास होता है या नहीं। साथ ही, ऑडिट फीस में इतनी भारी बढ़ोतरी के बाद कंपनी की फाइनेंशियल ट्रांसपेरेंसी किस तरह बदलती है, यह भी ट्रैक करने वाली बात होगी।
