Hi-Klass Trading and Investment के नतीजे मिले-जुले रहे हैं। कंपनी का रेवेन्यू **₹4.63 करोड़** तक पहुंच गया है, लेकिन इसके बावजूद कंपनी को **₹1.48 करोड़** का भारी नेट लॉस हुआ है। अब कंपनी नए सेक्टर्स में उतरने की तैयारी कर रही है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर एक नजर
Hi-Klass Trading and Investment की 33वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में कंपनी ने अपनी फाइनेंशियल सेहत का ब्योरा दिया। कंपनी का नेट लॉस पिछले साल के ₹42.04 लाख से बढ़कर इस साल ₹148.20 लाख पर पहुंच गया है। हालांकि, टोटल रेवेन्यू में जबरदस्त उछाल देखा गया है, जो कि पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹32.89 लाख से बढ़कर ₹463.62 लाख हो गया है। मुनाफे पर असर मुख्य रूप से ट्रेडिंग खर्चों और फेयर वैल्यू में हुई गिरावट के कारण पड़ा है।
बिजनेस में बड़े बदलाव की तैयारी
कंपनी ने अब अपने पुराने ढर्रे से हटकर एक नई दिशा पकड़ने का फैसला किया है। मैनेजमेंट शेयरहोल्डर्स से मंजूरी मांग रहा है ताकि वे 'डिस्ट्रेस्ड एसेट एक्विजिशन' (distressed asset acquisition), 'डेट सिंडिकेशन' और 'लोन पोर्टफोलियो मैनेजमेंट' जैसे नए और हाई-ग्रोथ क्षेत्रों में कदम रख सकें। कंपनी का मकसद अपनी कमाई के साधनों को और अधिक विविधता (diversify) प्रदान करना है।
मैनेजमेंट और बोर्ड में हलचल
कंपनी के टॉप लेवल पर भी बड़े बदलाव हुए हैं। मिस्टर दीपक झुनझुनवाला के इस्तीफे के बाद मिसेज भावना झा को नया CFO नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, कंपनी ने अगले 5 वर्षों के लिए M/s. S. Jaykishan को अपना नया स्टेट्यूटरी ऑडिटर बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिनकी सालाना फीस ₹1.50 लाख तय की गई है।
आगे की राह और रिस्क
निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि नए सेक्टर में उतरने के साथ 'एग्जीक्यूशन रिस्क' भी जुड़ा होता है। कंपनी का करंट बिजनेस काफी हद तक F&O और ट्रेडिंग इनकम पर निर्भर है, जिसमें भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि AGM में कंपनी के नए ऑब्जेक्ट क्लॉज को लेकर क्या फैसला आता है, जो इसके भविष्य की दिशा तय करेगा।
