Haryana Financial Corporation: BSE से डीलिस्टिंग को मिली मंजूरी, अब प्राइवेट होगी कंपनी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Haryana Financial Corporation: BSE से डीलिस्टिंग को मिली मंजूरी, अब प्राइवेट होगी कंपनी

Haryana Financial Corporation के शेयरधारकों ने BSE से कंपनी को स्वेच्छा से डीलिस्ट करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। प्रमोटर ग्रुप, जिसके पास **97.28%** हिस्सेदारी है, इस कदम का नेतृत्व कर रहा है। अब निवेशकों को एग्जिट ऑफर प्राइस और टेंडरिंग प्रोसेस का इंतज़ार है।

डीलिस्टिंग पर मुहर

शेयरधारकों ने पोस्टल बैलट और ई-वोटिंग के जरिए इस विशेष प्रस्ताव को पास कर दिया है। वोटिंग के आंकड़ों के अनुसार, कुल 4,510,200 वोट (डाले गए वोटों का 99.91%) प्रस्ताव के पक्ष में थे। वहीं, इसके खिलाफ मात्र 3,900 वोट ही पड़े।

क्यों लिया गया फैसला?

यह कदम कंपनी के प्राइवेट होने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (HSIIDC) के पास पहले से ही 97.28% हिस्सेदारी है। अब यह प्रक्रिया कंपनी के ओनरशिप स्ट्रक्चर को पूरी तरह से कंसोलिडेट करने का अंतिम चरण है।

अब आगे क्या?

कंपनी को अब SEBI और स्टॉक एक्सचेंज की गाइडलाइन्स के अनुसार सभी रेगुलेटरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद एक पब्लिक अनाउंसमेंट के जरिए 'एग्जिट ऑफर' जारी किया जाएगा, जिसमें वह कीमत तय होगी जिस पर कंपनी पब्लिक शेयरधारकों से अपने शेयर वापस खरीदेगी।

निवेशकों के लिए जरूरी बातें

  1. लिक्विडिटी रिस्क: डीलिस्टिंग की खबर के बाद ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी आ सकती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए।
  2. एग्जिट प्राइस: ऑफर किया जाने वाला एग्जिट प्राइस रेगुलेटरी नॉर्म्स के तहत तय होगा, जो कभी-कभी मार्केट की उम्मीदों से अलग हो सकता है।

अगले कुछ दिनों में निवेशकों को BSE की फाइलिंग्स पर नज़र रखनी चाहिए, जहां टेंडरिंग विंडो और प्राइस से जुड़ी आधिकारिक जानकारी साझा की जाएगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.