Haryana Financial Corporation ने BSE से खुद को वॉलंटरी डीलिस्ट (Voluntary Delisting) करने का ऐलान किया है। कंपनी ने अपने पब्लिक शेयरधारकों के लिए **₹9.55** प्रति शेयर का एग्जिट प्राइस तय किया है।
डीलिस्टिंग की प्रक्रिया और नियम
कंपनी ने SEBI के 2021 के नियमों के तहत यह कदम उठाया है। इस प्रस्ताव के पास होने के लिए 'स्पेशल रेजोल्यूशन' की जरूरत है, जिसमें पब्लिक शेयरधारकों के पक्ष में पड़ने वाले वोट विपक्ष में पड़ने वाले वोटों से कम से कम दोगुने होने चाहिए।
क्यों लिया गया फैसला?
Haryana Financial Corporation ने मई 2010 से ही अपनी लेंडिंग एक्टिविटी बंद कर दी थी। कंपनी पर अब कोई भी बकाया कर्ज (Debt) नहीं है। पिछले 12 महीनों में कंपनी के शेयरों में बहुत ही कम लिक्विडिटी देखी गई है, जहां कुल शेयरों का सिर्फ 0.004% हिस्सा ही ट्रेड हुआ है। मैनेजमेंट का मानना है कि अब शेयर बाजार में लिस्टेड रहने का कोई फायदा नहीं बचा है।
महत्वपूर्ण तारीखें और जानकारी
- वोटिंग विंडो: 28 अगस्त, 2026 से 26 सितंबर, 2026 तक।
- परिणाम: 29 सितंबर, 2026 तक आने की उम्मीद है।
- स्क्रूटिनाइजर: गिरिश मदान (Girish Madan & Associates) पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
फिलहाल, हरियाणा राज्य सरकार और प्रमोटरों के पास कंपनी की 99.36% हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 0.64% हिस्सा पब्लिक शेयरधारकों के पास है। यह कदम कंपनी की मौजूदा गैर-संचालन (non-operating) स्थिति के अनुरूप ही लिया गया है।
