Haryana Financial Corporation Ltd ने FY26 के ऑडिट नतीजों को मंजूरी दी, कंपनी बंद करने की सिफारिश
हरियाणा फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Haryana Financial Corporation Ltd) ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए अपने ऑडिट किए गए वित्तीय नतीजों की घोषणा की है। कंपनी ने ₹7.73 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) के ₹0.01 करोड़ के घाटे से एक बड़ा सुधार है। कुल आय (Total Income) भी FY26 में बढ़कर ₹12.32 करोड़ हो गई, जो FY25 में ₹2.86 करोड़ थी।
क्या है खास?
मुनाफे में वापसी के बावजूद, कंपनी एक अहम मोड़ पर खड़ी है। HFC ने राज्य सरकार को SFCs Act, 1951 के तहत खुद को बंद करने और लिक्विडेशन (Liquidation) की सिफारिश की है। इसके अलावा, राज्य सरकार ने BSE से HFC के शेयरों को Delist करने का भी फैसला किया है। ये कदम कंपनी के भविष्य को लेकर बड़ी चिंताएं पैदा करते हैं, जैसा कि ऑडिटर ने भी बताया है।
कंपनी की पृष्ठभूमि
HFC एक सरकारी वित्तीय संस्थान है। कंपनी को बंद करने और Delisting की सिफारिश रणनीतिक बदलाव या नियोजित समाप्ति का संकेत देती है, जो संभवतः रेगुलेटरी बदलावों या कंपनी के लंबे समय के वित्तीय प्रदर्शन से प्रभावित है।
आगे क्या होगा?
कंपनी लिक्विडेशन और Delisting की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है। Delisting प्रक्रिया के लिए एक मर्चेंट बैंकर (Merchant Banker) नियुक्त किया गया है और वैल्यूएशन रिपोर्ट (Valuation Report) पर विचार किया जा रहा है। शेयरधारक इन प्रक्रियाओं पर बारीकी से नजर रखेंगे, क्योंकि यही उनके निवेश के भविष्य और संभावित एग्जिट (Exit) को निर्धारित करेंगी।
जोखिम
मुख्य जोखिमों में लिक्विडेशन की सिफारिश के कारण कंपनी के भविष्य की अनिश्चितता, Delisting के कारण शेयर लिक्विडिटी (Liquidity) और एग्जिट प्राइस पर संभावित प्रभाव, और पूर्व कर्मचारियों और कर्जदारों से जुड़े अनिश्चित दावों वाले मुकदमे शामिल हैं। HFC की बुक्स और राज्य सरकार के खातों के बीच ₹2.21 करोड़ का अकाउंटिंग अंतर (Accounting Discrepancy) भी ध्यान देने योग्य है।
तुलना
चूंकि यह कंपनी लिक्विडेशन और Delisting से गुजर रही है, इसलिए परिचालन मेट्रिक्स (Operational Metrics) के आधार पर सीधी तुलना संभव नहीं है।
महत्वपूर्ण आंकड़े
- नेट प्रॉफिट/लॉस: FY26 में ₹7.73 करोड़ बनाम FY25 में ₹(0.01) करोड़।
- कुल आय: FY26 में ₹12.32 करोड़ बनाम FY25 में ₹2.86 करोड़।
- बेसिक/डाइल्यूटेड EPS: FY26 में ₹0.37 बनाम FY25 में ₹(0.00)।
आगे क्या देखें?
निवेशकों को Delisting प्राइस, वाइंडिंग-अप कमेटी (Winding-up Committee) की प्रगति और आकस्मिक देनदारियों (Contingent Liabilities) के समाधान पर किसी भी नए खुलासे पर नजर रखनी चाहिए। अकाउंटिंग अंतर का समाधान भी महत्वपूर्ण होगा।
