Haryana Financial Corp: बंद होने वाली कंपनी ने कमाया ₹7.73 करोड़ का मुनाफा! जानें क्या है आगे की कहानी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Haryana Financial Corp: बंद होने वाली कंपनी ने कमाया ₹7.73 करोड़ का मुनाफा! जानें क्या है आगे की कहानी
Overview

हरियाणा फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HFC) ने FY26 में ₹7.73 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। हालांकि, कंपनी 2010 से ही लेंडिंग ऑपरेशन्स बंद कर चुकी है और फिलहाल BSE से डीलिस्टिंग और वाइंड-अप (winding-up) की प्रक्रिया में है।

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Haryana Financial Corporation: FY26 के नतीजे और वाइंड-अप अपडेट

Haryana Financial Corporation Ltd. (HFC) ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने FY26 में ₹7.73 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹0.01 करोड़ के नेट लॉस से काफी बेहतर है। इस दौरान कंपनी की कुल आय ₹12.32 करोड़ रही।

हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि HFC मई 2010 से ही अपनी लेंडिंग एक्टिविटीज बंद कर चुकी है और अब बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) से डीलिस्टिंग और वाइंड-अप (winding-up) की प्रक्रिया से गुजर रही है।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

शेयरहोल्डर्स के लिए, यह प्रॉफिट इस संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि कंपनी अब ऑपरेशनल नहीं है और लिक्विडेशन (liquidation) की ओर बढ़ रही है। ऐसे में, कंपनी के प्रदर्शन से ज्यादा ध्यान एसेट्स की बिक्री और डीलिस्टिंग प्रक्रिया से मिलने वाले वैल्यू पर होगा। ऑडिटर ने भी 'Going Concern' पर संदेह जताया है, जो कंपनी के लिक्विडेशन की स्थिति को दर्शाता है।

जानिए पूरी कहानी

हरियाणा सरकार के स्वामित्व वाली यह फाइनेंशियल कंपनी अपने ऑपरेशन्स को बंद करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। राज्य सरकार ने लिक्विडेशन की सिफारिश की है और BSE से डीलिस्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वाइंड-अप प्रक्रिया को संभालने के लिए एक कमेटी और डीलिस्टिंग के लिए मर्चेंट बैंकर की नियुक्ति की जा चुकी है।

आगे क्या?

अब पूरा फोकस डीलिस्टिंग प्रक्रिया को पूरा करने और कंपनी की संपत्तियों को व्यवस्थित तरीके से वाइंड-अप करने पर रहेगा। निवेशक अंतिम वैल्यूएशन और लिक्विडेशन से मिलने वाले भुगतान का इंतजार करेंगे, जो उनके अंतिम रिटर्न को तय करेगा।

जोखिम और चुनौतियाँ

कुछ प्रमुख जोखिमों में पूर्व कर्मचारियों और टैक्स अथॉरिटीज से लंबित मुकदमेबाजी (litigation) शामिल है, जो एसेट वैल्यू को प्रभावित कर सकते हैं। ऑडिटर की 'Emphasis of Matter' रिपोर्ट 'Going Concern' स्टेटस को लेकर अनिश्चितता को उजागर करती है। इसके अलावा, कंपनी का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) 100% है, यानी पूरा लोन पोर्टफोलियो नॉन-परफॉर्मिंग है।

सहकर्मी कंपनियों से तुलना

चूंकि HFC लिक्विडेशन की प्रक्रिया में है, इसलिए ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के आधार पर सीधे सहकर्मी कंपनियों से तुलना करना संभव नहीं है। यह एक अनूठी स्थिति है, जहां बिजनेस ग्रोथ के बजाय एसेट रियलाइजेशन पर ध्यान केंद्रित है।

महत्वपूर्ण आंकड़े (Context Metrics)

  • नेट प्रॉफिट (FY26): ₹7.73 करोड़
  • कुल आय (FY26): ₹12.32 करोड़
  • संचित हानियाँ (31.03.2026 तक): ₹521.57 करोड़
  • पेड-अप इक्विटी कैपिटल (31.03.2026 तक): ₹207.66 करोड़
  • ग्रॉस एनपीए (31.03.2026 तक): 100%
  • लेंडिंग ऑपरेशन्स बंद: मई 2010

आगे क्या देखना है?

निवेशकों को डीलिस्टिंग प्राइस फाइनल होने, वाइंड-अप कमेटी की प्रगति और लंबित कानूनी विवादों के समाधान पर करीबी नजर रखनी चाहिए।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.