गुजरात थेमिस बायोसिं (Gujarat Themis Biosyn) की क्रेडिट रेटिंग्स को CARE ने 'Rating Watch with Negative Implications' के तहत रखा है। कंपनी अधिग्रहण के चलते बढ़े कर्ज के जोखिम को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, कंपनी ने रेटिंग एजेंसी के फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि यह पीछे के समय को देखकर लिया गया फैसला है और कंपनी **₹1,000 करोड़** की QIP लाने की योजना बना रही है।
क्यों आई रेटिंग पर आंच?
रेटिंग एजेंसी CARE ने गुजरात थेमिस बायोसिं लिमिटेड की क्रेडिट रेटिंग्स को 'Rating Watch with Negative Implications' के तहत डाल दिया है। इसकी वजह कंपनी की बड़ी अधिग्रहण योजनाएं हैं। कंपनी जापान की MicroBiopharm Japan Co. को ¥1.5 बिलियन में और Sanofi के एंटी-इंफेक्टिव पोर्टफोलियो को €158 मिलियन में खरीदने वाली है।
CARE का मानना है कि ये अधिग्रहण कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) के मुकाबले काफी बड़े हैं और इससे कंपनी पर कर्ज का भारी जोखिम आ सकता है। साथ ही, इस अधिग्रहण के लिए फंड की व्यवस्था कैसे होगी, इसे लेकर भी अनिश्चितता है। अनुमान है कि कंपनी का गियरिंग रेशियो (Gearing Ratio) FY25 के 0.12x से बढ़कर FY26 में 0.56x हो जाएगा। वहीं, इंटरेस्ट कवरेज रेशियो (Interest Coverage Ratio) 193.27x से घटकर 26.09x पर आ सकता है।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
इस रेटिंग एक्शन का मतलब है कि कंपनी की वित्तीय स्थिरता पर सवाल उठ रहे हैं और क्रेडिट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। 'Rating Watch with Negative Implications' का मतलब है कि एजेंसी भविष्य में रेटिंग घटा सकती है। इससे कंपनी को भविष्य में लोन लेने में दिक्कत आ सकती है या उसे महंगे ब्याज पर लोन लेना पड़ सकता है। कंपनी और रेटिंग एजेंसी के बीच यह मतभेद निवेशकों के लिए एक बड़ा मौका है कि वे कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटेजी (Growth Strategy) के रिस्क (Risk) का आकलन करें।
कंपनी का पक्ष
गुजरात थेमिस बायोसिं ने रेटिंग एजेंसी के फैसले पर खुलकर असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि यह रेटिंग 'बहुत ज्यादा पीछे देखकर' (overly backward-looking) ली गई है और इसमें कंपनी की मजबूत लिक्विडिटी (Liquidity) और ₹1,000 करोड़ की QIP (Qualified Institutional Placement) लाने की योजना को ध्यान में नहीं रखा गया है। कंपनी ने अपनी दलीलों को रेटिंग के साथ पब्लिश करने की भी मांग की है, जो यह दर्शाता है कि वे कंपनी के वित्तीय भविष्य को लेकर काफी आश्वस्त हैं।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को ₹1,000 करोड़ की QIP को लाने में कंपनी की सफलता पर कड़ी नजर रखनी होगी। यह अधिग्रहण के फंड की व्यवस्था करने और कर्ज का बोझ कम करने के लिए बेहद जरूरी है। इसके अलावा, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि कंपनी अधिग्रहीत कंपनियों को कितनी अच्छी तरह इंटीग्रेट (Integrate) कर पाती है और बढ़े हुए कर्ज को चुकाने के लिए पर्याप्त EBITDA जनरेट कर पाती है या नहीं।
