GSFC के ₹127 करोड़ के नुकसान और ऑडिट पर सवाल
गुजरात स्टेट फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (GSFC) ने 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए ₹127.29 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर के ₹125.34 करोड़ के नुकसान की तुलना में यह आंकड़ा बढ़ा है। वहीं, FY26 की चौथी तिमाही में भी कंपनी को ₹32.38 करोड़ का नेट लॉस हुआ। पूरे साल के लिए कंपनी की अर्निंग्स पर शेयर (EPS) -₹14.28 रही।
ऑडिटर ने 9वीं बार उठाए सवाल
GSFC के लिए यह चिंताजनक स्थिति लगातार 9वें साल बनी हुई है। कंपनी के ऑडिटर, पंकज आर. शाह एंड एसोसिएट्स, ने एक बार फिर क्वालिफाइड ओपिनियन (Qualified Opinion) जारी किया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ऑडिटर ने कंपनी की 'गोइंग कंसर्न' (Going Concern) यानी एक सतत चलने वाली इकाई के रूप में काम करने की क्षमता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ऑडिटर का कहना है कि कंपनी का नेट वर्थ (Net Worth) काफी घट गया है और वह डिफॉल्ट (Default) की स्थिति में है।
हालांकि, GSFC मैनेजमेंट का कहना है कि एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) होने के नाते, जिसका गठन क्षेत्रीय विकास के लिए हुआ है, कंपनी का संचालन जारी रहना चाहिए ताकि रिकवरी फंक्शन (Recovery Function) को पूरा किया जा सके।
एसेट क्वालिटी की गंभीर समस्या
कंपनी की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) बहुत खराब स्थिति में है। कंपनी के ग्रॉस और नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) ₹397.41 करोड़ हैं। नेट एनपीए (Net NPA) का नेट एडवांसेज (Net Advances) से अनुपात 100% तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि कंपनी का पूरा मौजूदा लोन बुक नॉन-परफॉर्मिंग है और उससे रिकवरी की उम्मीद बहुत कम है।
कंपनी की वर्तमान स्थिति
GSFC पिछले कई सालों से वित्तीय संकट से जूझ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने अपनी मुख्य लेंडिंग एक्टिविटीज़ (Lending Activities) बंद कर दी हैं और अब सिर्फ बकाया वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसी वजह से एसेट क्वालिटी में सुधार नहीं हो रहा है। बार-बार क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन कंपनी के अंदर गवर्नेंस (Governance) और फाइनेंशियल रिपोर्टिंग (Financial Reporting) की पुरानी समस्याओं को उजागर करते हैं।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
यह स्थिति निवेशकों के लिए कंपनी की फंडामेंटल (Fundamental) वित्तीय चुनौतियों को दर्शाती है। ऑडिटर की 'गोइंग कंसर्न' स्थिति पर बार-बार चेतावनियां और निगेटिव नेट वर्थ (रिजर्व ₹3,281.95 करोड़ निगेटिव में) कंपनी की संस्थागत इंसॉल्वेंसी (Institutional Insolvency) को दिखाता है। मैनेजमेंट का कहना है कि बिजनेस की व्यवहार्यता (Viability) से ज्यादा, उनका वैधानिक दायित्व (Statutory Mandate) महत्वपूर्ण है।
आगे क्या देखना है?
निवेशकों को GSFC के बकाया वसूली के प्रयासों और सरकार से मिलने वाले किसी भी नीतिगत निर्णय या समर्थन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। क्वालिफाइड ऑडिट ओपिनियन और 'गोइंग कंसर्न' पर संदेह जैसे मुद्दे आगे भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
