GSFC का ₹127 करोड़ का नेट लॉस
गुजरात स्टेट फाइनेंशियल कॉर्पोरेशन (GSFC) ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के लिए ₹127.29 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह पिछले वित्त वर्ष के ₹125.34 करोड़ के घाटे से थोड़ी ज्यादा बढ़ोतरी है। कंपनी ने अब अपना मुख्य टर्म-लेंडिंग का काम बंद कर दिया है और पूरी तरह से बकाया कर्जों की वसूली पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
निवेशक क्यों चिंतित हैं?
GSFC अब अपने मुख्य लेंडिंग बिजनेस में सक्रिय नहीं है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। कंपनी का पूरा ध्यान अब पुराने कर्जों को वसूलने पर है, जो इसके बिजनेस मॉडल और वित्तीय सेहत में बड़े बदलाव का संकेत देता है। लगातार हो रहा घाटा और ऑडिटर की टिप्पणी कंपनी के भविष्य पर सवाल खड़े कर रही है।
कंपनी की मौजूदा स्थिति
GSFC पिछले कई सालों से वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही है। 31 मार्च, 2026 तक कंपनी की नेट वर्थ पूरी तरह खत्म हो चुकी है, और रिजर्व्स एंड सरप्लस ₹3,281.95 करोड़ के नेगेटिव में हैं। इस गंभीर स्थिति के कारण, ऑडिटर लगातार 9 सालों से इसकी 'गोइंग कंसर्न' (कंपनी के चलते रहने की क्षमता) की योग्यता पर सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या?
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए, बोर्ड ने M/s. J.H. Mehta & Co. को स्टेट्यूटरी ऑडिटर के तौर पर नियुक्त करने का प्रस्ताव दिया है। कंपनी अपनी 66वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) 30 जुलाई, 2026 को आयोजित करेगी। हालांकि, कंपनी की मुख्य रणनीति अभी भी कर्जों की वसूली पर केंद्रित रहेगी।
मुख्य जोखिम
सबसे बड़ा जोखिम 'गोइंग कंसर्न' ऑडिट क्वालिफिकेशन का जारी रहना है, जो कंपनी की संचालन क्षमता पर गंभीर संदेह पैदा करता है। खत्म हो चुकी नेट वर्थ और लोन चुकाने में डिफॉल्ट का खतरा इस जोखिम को और बढ़ा देता है। गुजरात सरकार को बकाया राशि की पुष्टि और उस पर लगने वाले ब्याज व जुर्माने का भी संभावित असर पड़ सकता है।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को कंपनी की कर्जों की वसूली की क्षमता पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। किसी भी संभावित रीस्ट्रक्चरिंग या सरकारी हस्तक्षेप पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण होगा। आगामी एजीएम के नतीजे और अगले वित्त वर्ष के लिए ऑडिटर की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण संकेत देंगे।
