गोल्डन लेजेंड लीजिंग का कमाल: घाटे से मुनाफे में वापसी, पर ऑडिट में फंसी कंपनी!
Golden Legend Leasing & Finance Ltd. ने अपने निवेशकों को राहत देते हुए, 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए ₹10.30 करोड़ (₹1,029.75 लाख) का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। यह पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 के ₹2.20 करोड़ (₹219.95 लाख) के घाटे से एक बड़ी वापसी है। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू ₹183.59 करोड़ (₹18,358.82 लाख) रहा।
सवालिया घेरे में कंपनी के आंकड़े
लेकिन, इस प्रॉफिट की कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है। कंपनी के स्टैट्यूटरी ऑडिटर ने इन नतीजों पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' (Qualified Opinion) दी है। इसका मतलब है कि ऑडिटर को कंपनी के कुछ वित्तीय पहलुओं पर पर्याप्त सबूत नहीं मिले हैं।
ऑडिटर की मुख्य चिंताएं इस प्रकार हैं:
- संदिग्ध लेनदेन: ₹75.28 करोड़ (₹7,528.18 लाख) के ऐसे लेनदेन मिले हैं, जिनका बैंक अकाउंट अभी लीज पर है और मामला कोर्ट में चल रहा है।
- बिना वेरिफिकेशन वाले खर्चे: ₹104.32 करोड़ (₹10,432.21 लाख) के एजेंट कमीशन जैसे खर्चे ऐसे हैं, जिनके लिए पर्याप्त सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट्स नहीं मिले हैं।
- रेवेन्यू की अनिश्चितता: रेवेन्यू के मिलान में भी कुछ पेंडिंग मुद्दे हैं, जो अनिश्चितता बढ़ा रहे हैं।
पिछला साल और अब की स्थिति
पिछले वित्तीय वर्ष 2025 में कंपनी को ₹2.20 करोड़ का घाटा हुआ था। इस साल के प्रॉफिट से स्थिति तो सुधरी है, लेकिन ऑडिटर की रिपोर्ट कंपनी के खातों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। इसी वित्तीय वर्ष में कंपनी ने ₹13.03 करोड़ (₹1,303.21 लाख) के लोन भी राइट-ऑफ किए हैं, जो लोन पोर्टफोलियो की क्वालिटी पर चिंता बढ़ाता है।
आगे क्या?
हालांकि कंपनी कागजों पर प्रॉफिट में दिख रही है, ऑडिटर की 'क्वालिफाइड ओपिनियन' निवेशकों के लिए एक चेतावनी है। उन्हें रिपोर्ट किए गए मुनाफे के साथ-साथ ऑडिटर द्वारा बताई गई अनिश्चितताओं पर भी गौर करना होगा। कंपनी ने अपने उधार लेने की सीमा को भी बढ़ाकर ₹500 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है, जिसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी चाहिए।
जोखिम और आगे की राह
इस खबर में सबसे बड़े जोखिम 'क्वालिफाइड ओपिनियन', कोर्ट में चल रहा मामला और बिना वेरिफिकेशन वाले खर्चे हैं। ₹75.28 करोड़ की संपत्ति का लीज पर होना जोखिम को और बढ़ाता है। निवेशकों को कंपनी के इस बात पर काम करने का इंतजार करना चाहिए कि वह ऑडिटर द्वारा उठाए गए मुद्दों को कैसे सुलझाती है, खासकर संदिग्ध लेनदेन और खर्चों के वेरिफिकेशन को लेकर।
