Golden Legand Leasing & Finance ने फाइनेंशियल ईयर **2026** में शानदार टर्नअराउंड दर्ज करते हुए **₹10.30 करोड़** का मुनाफा कमाया है, जबकि पिछले साल कंपनी को नुकसान हुआ था। हालांकि, भारी मुनाफे के बावजूद कंपनी इंटरनल कंट्रोल्स और खर्चों की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का पूरा सच
कंपनी ने FY26 के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिसमें रेवेन्यू ₹183.59 करोड़ तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के ₹9.34 करोड़ के मुकाबले काफी अधिक है। कंपनी अब घाटे से उबरकर ₹10.30 करोड़ के प्रॉफिट में आ गई है। इस ग्रोथ के बीच, कंपनी 28 सितंबर, 2026 को होने वाली अपनी 42वीं AGM में उधारी सीमा (Borrowing Limit) को बढ़ाकर ₹500 करोड़ करने की तैयारी में है।
ऑडिटर की चिंता और रिस्क
तेजी के इस माहौल में कंपनी के लिए खतरे की घंटी भी बजी है। ऑडिटर ने कंपनी की एकाउंटिंग पर 'क्वालिफाइड ओपिनियन' जारी किया है। मुख्य चिंताएं ये हैं:
- अनवेरिफाइड एक्सपेंस: करीब ₹104.32 करोड़ के एजेंट कमीशन पर कोई ठोस डॉक्यूमेंटेशन नहीं मिला है।
- संदिग्ध लेनदेन: Prime Technologies के साथ ₹75.28 करोड़ के लीन (lien) ट्रांजैक्शन पर सवाल उठे हैं।
- कंट्रोल की कमी: इंटरनल कंट्रोल और बैंक रीकंसीलिएशन की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं है।
आगे क्या होगा?
निवेशकों की नजर अब 28 सितंबर की AGM पर है। इसमें बोर्ड में बदलाव और उधारी बढ़ाने के प्रस्तावों पर स्पष्टता जरूरी है। इसके अलावा, कंपनी को यह भी बताना होगा कि वह प्राइम टेक्नोलॉजीज से जुड़े सवालों का जवाब कैसे देगी। कंपनी का आक्रामक विस्तार तो दिख रहा है, लेकिन पारदर्शिता की कमी लंबी अवधि में निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क बन सकती है।
