Geetanjali Credit and Capital Ltd ने सितंबर तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी को **₹5.72 लाख** का नेट लॉस हुआ है, लेकिन असली डर ऑडिटर्स की चेतावनी से पैदा हो गया है, जिन्होंने कंपनी की बैलेंस शीट और RBI के नियमों के पालन पर बड़े सवाल खड़े किए हैं।
ऑडिटर्स की कड़ी चेतावनी
सितंबर तिमाही के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी की ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹20.21 लाख रही, लेकिन इसके साथ ही ऑडिट फर्म S K Bhavsar & Co. ने अपनी रिपोर्ट में गंभीर 'Emphasis of Matter' दर्ज किया है। यह रिपोर्ट कंपनी के फाइनेंशियल कामकाज पर भरोसा कम करती है।
क्यों घबराए हैं निवेशक?
ऑडिटर्स ने कंपनी की इंटरनल वर्किंग को लेकर तीन बड़े खतरे बताए हैं:
- अस्पष्ट एसेट्स: ऑडिटर ₹295.07 लाख के लोन और एडवांस की पुष्टि नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा, कंपनी के निवेश की सही वैल्यू भी नहीं मिल पाई है।
- RBI नियमों का उल्लंघन: रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) और ब्याज की गणना को लेकर RBI के तय नियमों का पालन नहीं कर रही है।
- टैक्स का भारी दबाव: कंपनी पर ₹529.75 लाख की इनकम टैक्स डिमांड लंबित है, जिसके लिए कंपनी के पास कोई ठोस दस्तावेज या कागजात मौजूद नहीं हैं।
निवेशकों के लिए जोखिम
सबसे बड़ी समस्या एसेट क्वालिटी को लेकर है। चूंकि ऑडिटर्स लोन और इन्वेस्टमेंट की पुष्टि नहीं कर पा रहे हैं, इसलिए कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) पर बड़ा संशय बना हुआ है। RBI के नॉर्म्स को नजरअंदाज करने का मतलब है कि कंपनी की फाइनेंशियल हेल्थ वैसी नहीं है जैसी कागजों पर दिख रही है। साथ ही, लंबित टैक्स डिमांड कंपनी के कैश फ्लो पर भविष्य में बड़ा असर डाल सकती है।
अगले कुछ दिनों में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या कंपनी इन रेगुलेटरी सवालों का कोई स्पष्ट जवाब देती है या नहीं।
