Garbi Finvest Ltd के लिए एक बड़ी गवर्नेंस चुनौती सामने आई है। कंपनी के स्टेट्यूटरी ऑडिटर M/s Kushal S. Poonia & Co. ने बकाया प्रोफेशनल फीस न मिलने के कारण इस्तीफा दे दिया है।
ऑडिटर ने क्यों दिया इस्तीफा?
Garbi Finvest Ltd के लिए स्थिति तब गंभीर हो गई जब उनके स्टेट्यूटरी ऑडिटर M/s Kushal S. Poonia & Co. ने कंपनी से अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफे का मुख्य कारण कंपनी द्वारा लंबे समय से उनकी प्रोफेशनल फीस का भुगतान न करना बताया गया है। ऑडिटर ने अपना इस्तीफा 3 नवंबर, 2026 को ईमेल के जरिए भेजा है, जो 30 अक्टूबर, 2026 के उनके पत्र का हिस्सा था। अब ऑडिटर केवल 30 सितंबर, 2026 को समाप्त हुई तिमाही के लिए 'लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट' (Limited Review Report) पूरी करेंगे और उसके बाद पद छोड़ देंगे।
निवेशकों के लिए खतरे की घंटी
शेयर बाजार में ऑडिटर का इस तरह फीस के विवाद के कारण पद छोड़ना एक बड़ा 'रेड फ्लैग' माना जाता है। यह सीधा संकेत देता है कि कंपनी नकदी (Liquidity) के गंभीर संकट से जूझ रही है। यह न केवल कंपनी के फाइनेंशियल हेल्थ पर सवाल खड़े करता है, बल्कि कंपनी की इंटरनल गवर्नेंस और पारदर्शिता पर भी गहरा असर डालता है।
अब आगे क्या होगा?
कंपनी ने इस इस्तीफे पर चर्चा करने के लिए 13 नवंबर, 2026 को एक बोर्ड मीटिंग बुलाई है। 'कंपनीज एक्ट, 2013' और SEBI के नियमों के मुताबिक, कंपनी के लिए जल्द से जल्द नए ऑडिटर की नियुक्ति करना अनिवार्य है। हालांकि, इस घटना के बाद बाजार में अनिश्चितता का माहौल रह सकता है, जिससे शेयर की चाल प्रभावित हो सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
निवेशकों को अब कंपनी की लिक्विडिटी स्थिति पर पैनी नजर रखने की जरूरत है। क्या कंपनी अन्य क्रेडिटर्स को भी समय पर भुगतान कर रही है? इसके अलावा, नया ऑडिटर कितनी जल्दी नियुक्त होता है, यह कंपनी की स्थिरता को मापने का सबसे बड़ा पैमाना होगा। किसी भी प्रकार की देरी या कंप्लायंस में चूक निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क साबित हो सकती है।
