GIC Housing Finance: ₹200 करोड़ NCD इश्यू की तैयारी, पर NPA में बड़ा उछाल!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
GIC Housing Finance: ₹200 करोड़ NCD इश्यू की तैयारी, पर NPA में बड़ा उछाल!

GIC Housing Finance ने ₹200 करोड़ जुटाने के लिए नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) इश्यू लॉन्च करने का ऐलान किया है। इन पैसों का इस्तेमाल होम लोन और कर्ज चुकाने में होगा। हालांकि, कंपनी की एसेट क्वालिटी बिगड़ गई है, ग्रॉस NPA बढ़कर **4.74%** हो गया है।

Detailed Coverage

GIC Housing Finance की नई योजना

GIC Housing Finance लिमिटेड 'NCD सीरीज 12 ट्रेंच 1' के तहत ₹200 करोड़ का सुरक्षित, लिस्टेड, रेटेड, रिडीमेबल, टैक्सेबल नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) इश्यू ला रही है। इन NCDs पर 8.15% प्रति वर्ष का कूपन रेट मिलेगा और इनकी मैच्योरिटी 548 दिनों के बाद, 28 जनवरी 2028 को होगी। इस इश्यू को CRISIL से AA+/Stable की रेटिंग मिली है।

क्यों हो रहा है यह फंड जुटाना?

इस फंड का इस्तेमाल कंपनी अपनी हाउसिंग फाइनेंस डिसबर्समेंट को बढ़ाने और मौजूदा उधारी या कर्ज को चुकाने/रिफाइनेंस करने के लिए करेगी। यह कदम कंपनी के मुख्य बिजनेस ऑपरेशंस को सपोर्ट करने के लिए लिक्विडिटी की जरूरत को दर्शाता है।

एसेट क्वालिटी पर चिंता

हालांकि, कंपनी की एसेट क्वालिटी में गिरावट देखी गई है। जून 2025 में ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPA) बढ़कर 4.74% हो गया है, जो मार्च 2025 में 3.03% था। मैनेजमेंट के मुताबिक, यह बढ़ोतरी लगभग ₹169 करोड़ की प्रॉपर्टीज को 'Assets Held for Sale' से 'Loans at amortised cost' में री-क्लासिफाई करने की वजह से हुई है। इस अकाउंटिंग एडजस्टमेंट के कारण क्वार्टर में प्रोविजनिंग भी बढ़ी है, जिससे प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में भारी गिरावट आई है। जून 2025 तिमाही में PAT सिर्फ ₹7 करोड़ रहा, जबकि पिछले क्वार्टर (मार्च 2025) में यह ₹160 करोड़ था।

निवेशकों के लिए क्या है?

NCD इश्यू निवेशकों को 'CRISIL AA+/Stable' रेटिंग के साथ एक फिक्स्ड इनकम का मौका दे रहा है। वहीं, मौजूदा शेयरधारकों को कंपनी की एसेट क्वालिटी, खासकर लोंस अगेंस्ट प्रॉपर्टी (LAP) सेगमेंट में बढ़ती डिफॉल्ट पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी NHB के कैपिटल रिक्वायरमेंट्स का पालन कर रही है और GIC-Re जैसे प्रमोटर्स का सपोर्ट भी इसे मिल रहा है।

जोखिम पर नजर

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम गिरती हुई एसेट क्वालिटी है। NCDs को भले ही रेट किया गया हो, लेकिन कंपनी के लोन बुक, खासकर LAP सेगमेंट और पुरानी पोर्टफोलियो के परफॉरमेंस पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी। महाराष्ट्र के बाहर भौगोलिक विविधीकरण (Geographical Diversification) भी एक महत्वपूर्ण फैक्टर रहेगा।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को कंपनी की भविष्य की एसेट क्वालिटी रिपोर्ट्स, प्रोविजनिंग लेवल्स और लोन बुक के परफॉरमेंस, विशेष रूप से LAP सेगमेंट में, पर कड़ी नजर रखनी चाहिए। कंपनी की भौगोलिक विविधीकरण (Geographical Diversification) रणनीति की सफलता भी महत्वपूर्ण होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.