Future Consumer Ltd के लिए बुरी खबर है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), मुंबई ने कंपनी को कॉर्पोरेट इंसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) में डाल दिया है। इसका मतलब है कि अब कंपनी पर एक तरह से रोक (Moratorium) लग गई है और मैनेजमेंट का कंट्रोल एक इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) को सौंप दिया गया है।
NCLT का बड़ा फैसला
NCLT, मुंबई बेंच-VI ने Future Consumer Ltd को इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की धारा 7 के तहत CIRP में स्वीकार कर लिया है। यह फैसला रेजर्जेंट इंडिया स्पेशल सिचुएशन्स फंड द्वारा दायर इंसॉल्वेंसी याचिका के बाद आया है। इस प्रक्रिया के तहत, कंपनी के खिलाफ सभी कानूनी कार्रवाई रुक गई है और उसकी संपत्तियों के लेन-देन पर भी रोक लगा दी गई है।
कितना बड़ा है डिफॉल्ट?
कंपनी पर कुल ₹263.77 करोड़ का डिफॉल्ट दर्ज किया गया है। वहीं, फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के लिए कंपनी की ग्रॉस इनकम ₹853.92 करोड़ बताई गई है।
आगे क्या होगा?
CIRP में जाने के बाद, Future Consumer Ltd का मैनेजमेंट अब इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) के हाथ में चला गया है। Aegis Resolution Services Private Limited को IRP नियुक्त किया गया है। कंपनी के बोर्ड और पुराने मैनेजमेंट को अब IRP के साथ पूरा सहयोग करना होगा। IRP अब कंपनी को एक 'गोइंग कंसर्न' के तौर पर चलाएगा और एक रेजोल्यूशन प्लान बनाने की कोशिश करेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
NCLT ने माना कि कंपनी पर स्वीकार किए गए देनदारियों (Admitted Liabilities) का भुगतान नहीं हुआ है। Future Consumer Ltd ने यह दलील देने की कोशिश की थी कि वह एक 'गोइंग कंसर्न' है और Aussee Oats Milling Private Limited के साथ आर्बिट्रेशन से रिकवरी की उम्मीद है। लेकिन ट्रिब्यूनल ने इस दलील को खारिज कर दिया, यह कहते हुए कि वित्तीय संकट या भविष्य की संभावित आय डिफॉल्ट के स्पष्ट मामले को नहीं बदल सकती।
पिछला इतिहास
यह भी ध्यान देने योग्य है कि रिलायंस रिटेल वेंचर्स लिमिटेड के साथ एक संभावित डील, जो कानूनी पचड़ों के कारण अटक गई थी, कंपनी की लंबी वित्तीय मुश्किलों को दर्शाती है।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा जोखिम रेजोल्यूशन प्लान की व्यवहार्यता (Viability) को लेकर अनिश्चितता है। इसके अलावा, मौजूदा इक्विटी में भारी डाइल्यूशन (Dilution) का खतरा भी है। CIRP की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने संभावित रेजोल्यूशन एप्लीकेंट्स सामने आते हैं और लेनदार (Creditors) किस हद तक एक व्यवहार्य प्लान पर सहमत होते हैं।
आगे क्या ट्रैक करें?
निवेशकों को अब क्रेडिटर कमेटी (CoC) के गठन और IRP द्वारा रेजोल्यूशन प्रोसेस की प्रगति के बारे में की जाने वाली किसी भी सार्वजनिक घोषणा पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए।
