Frontline Financial Services ने FY 2025-26 के नतीजे पेश किए हैं, जिसमें कंपनी का मुनाफा मात्र **₹0.0008 करोड़** रहा। हालांकि, कंपनी के लिए बड़ी मुसीबत यह है कि इसके स्टैच्यूटरी ऑडिटर ने कंपनी की एसेट और डॉक्यूमेंटेशन पर गहरा संदेह जताते हुए 'Disclaimer of Opinion' जारी किया है।
मुनाफे का हाल और ऑडिटर की चिंता
कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में ₹2.94 करोड़ की कुल इनकम के मुकाबले केवल ₹0.0008 करोड़ का मामूली प्रॉफिट दर्ज किया है। इस बार कंपनी ने कोई डिविडेंड नहीं देने का फैसला किया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात M/s. J.S Shah and Co द्वारा जारी की गई 'Disclaimer of Opinion' रिपोर्ट है, जो यह बताती है कि ऑडिटर को कंपनी की वित्तीय स्थिति को वेरिफाई करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले।
क्यों है यह रेड फ्लैग?
ऑडिटर ने कई संपत्तियों पर सवाल उठाए हैं:
- ₹1 करोड़ की जमीन (Sanand) के दस्तावेज गायब हैं।
- ₹2.15 करोड़ की इन्वेंट्री का कोई अता-पता नहीं है।
- Tamilnad Mercantile Bank में मौजूद बैलेंस की पुष्टि नहीं हो पाई है।
गवर्नेंस में बड़ी खामियां
ऑडिट में यह भी सामने आया है कि कंपनी का अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरता, क्योंकि इसमें 'ऑडिट ट्रेल' या 'एडिट लॉग' की सुविधा ही नहीं है। इतना ही नहीं, कंपनी पर नियमों को ताक पर रखकर जनता से डिपॉजिट लेने का भी आरोप लगा है। इसके अलावा, कंपनी ₹1.3 करोड़ से ज्यादा के पुराने टैक्स विवादों (Assessment Year 2009-10 और 2010-11) में फंसी हुई है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें 30 सितंबर, 2026 को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) पर टिकी हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि मैनेजमेंट ऑडिटर द्वारा उठाए गए सवालों का क्या जवाब देता है और कंपनी की साख बचाने के लिए वे क्या कदम उठाते हैं। कंपनी नए सेक्रेटेरियल ऑडिटर के तौर पर Ms. Manali Davda की नियुक्ति की भी योजना बना रही है।
