Fischer Medical Ventures ने ₹350 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने और अपनी कुल कर्ज लेने की सीमा को ₹1,000 करोड़ तक बढ़ाने के लिए पोस्टल बैलट के जरिए शेयरधारकों से मंजूरी मांगी है।
क्या है कंपनी का प्लान?
Fischer Medical Ventures Limited ने फंड जुटाने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए एक पोस्टल बैलट प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी का मुख्य लक्ष्य ₹350 करोड़ के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करना है। इसके साथ ही, कंपनी ने अपने कुल कर्ज की सीमा को बढ़ाकर ₹1,000 करोड़ करने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रक्रिया में सहायक कंपनियों की संपत्तियों पर चार्ज बनाना और उनकी 100% इक्विटी को गिरवी रखना शामिल है।
क्यों है यह महत्वपूर्ण?
यह कदम कंपनी के लिए कैपिटल मार्केट से फंडिंग जुटाने का एक कानूनी जरिया तैयार करेगा। क्रेडिट प्रोफाइल को मजबूत करने के लिए कंपनी ने FMV Holdings Pte. Ltd. और Mercatus Capital Pte. Ltd. जैसी प्रोमोटर-लिंक्ड कंपनियों से कॉर्पोरेट गारंटी हासिल की है। कंपनी 2.5x का सिक्योरिटी कवर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है और यदि यह 2.25x से नीचे गिरता है, तो टॉप-अप करने के सख्त प्रोटोकॉल भी लागू होंगे।
निवेशकों के लिए जोखिम और आगे की राह
निवेशकों को प्रोमोटर-संबंधित कंपनियों के साथ बढ़ते एक्सपोजर पर सावधानी बरतनी चाहिए। जैसे-जैसे कंपनी ₹1,000 करोड़ की कर्ज सीमा के करीब पहुंचेगी, उसका लेवरेज प्रोफाइल बदलेगा। वोटिंग की प्रक्रिया 17 अक्टूबर, 2026 से 15 नवंबर, 2026 तक चलेगी और परिणाम 17 नवंबर, 2026 को घोषित किए जाएंगे। नतीजों के बाद, बाजार अब NCD के कूपन रेट, अवधि और अन्य शर्तों पर कंपनी की घोषणाओं पर नजर रखेगा।
