First Custodian Fund India के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 निराशाजनक रहा है। कंपनी को **₹27.17 लाख** का नेट लॉस हुआ है, जबकि पिछले साल कंपनी **₹173.96 लाख** के मुनाफे में थी। चौंकाने वाली बात यह है कि कंपनी में ऑडिट कमिटी और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स जैसे जरूरी पदों का अभाव है।
बिगड़ती फाइनेंशियल सेहत
कंपनी के प्रदर्शन में आई यह गिरावट काफी चिंताजनक है। FY26 में कंपनी की ग्रॉस इनकम गिरकर ₹47.21 लाख रह गई है, जो पिछले साल ₹304.61 लाख थी। इसके साथ ही अर्निंग पर शेयर (EPS) भी 10.60 से गिरकर (1.81) के नुकसान में आ गया है।
गवर्नेंस और रेगुलेटरी रिस्क
कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि वह 'कंपनी एक्ट 2013' और SEBI के नियमों का पालन नहीं कर रही है। इसमें सबसे बड़ी कमी ऑडिट कमिटी, नॉमिनेशन और रेम्यूनरेशन कमिटी और महिला डायरेक्टर्स की अनुपस्थिति है। मैनेजमेंट ने अपने बचाव में तर्क दिया है कि उनका बिजनेस ऑपरेशन काफी छोटा है, इसलिए उन्हें इन नियमों की जरूरत नहीं है।
ऑडिटर्स की चेतावनी
सेक्रेटेरियल ऑडिटर ने अपनी रिपोर्ट में इस पर सख्त आपत्ति जताई है। हालांकि स्टेट्यूटरी ऑडिटर ने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स पर कोई सवाल नहीं उठाए हैं, लेकिन कंपनी का स्ट्रक्चर अभी भी स्टैंडर्ड कॉरपोरेट गवर्नेंस मानकों से काफी दूर है। फिलहाल कंपनी NSE पर एक स्टॉक ब्रोकर के तौर पर काम कर रही है और एफएंडओ (F&O) ट्रेडिंग में सक्रिय है। निवेशकों को अब इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या स्टॉक एक्सचेंज रेगुलेटरी नॉन-कम्प्लायंस के चलते कंपनी पर कोई एक्शन लेता है या नहीं।
