Fino Payments Bank ने अपनी FY26 की बिजनेस रिस्पॉन्सिबिलिटी और सस्टेनेबिलिटी रिपोर्ट जारी की है। कंपनी ने ₹1,587.9 करोड़ का टर्नओवर दर्ज किया है, लेकिन साथ ही CID द्वारा बैंक खाते पर लगाए गए ₹11.92 करोड़ के 'lien' का खुलासा भी किया है जिसे बैंक हाईकोर्ट में चुनौती दे रहा है।
फाइनेंशियल और ऑपरेशनल परफॉरमेंस
Fino Payments Bank की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का टोटल टर्नओवर ₹1,587.9 करोड़ रहा है, जबकि नेट वर्थ ₹805.21 करोड़ दर्ज की गई है। डिजिटल अडॉप्शन के मोर्चे पर बैंक ने 60 लाख से ज्यादा एक्टिव यूजर्स का लक्ष्य पार कर लिया है।
कानूनी और रेगुलेटरी अपडेट्स
रिपोर्ट में कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट पर असर डालने वाली कुछ अहम घटनाओं का जिक्र किया है:
- CID Lien: मर्चेंट सर्विसेज से जुड़े एक मामले में CID ने बैंक के अकाउंट पर ₹11.92 करोड़ का 'lien' (कब्जा/रोक) लगाया है। बैंक का कहना है कि इसमें न तो बैंक और न ही उसके कर्मचारी आरोपी हैं। निचली अदालत से राहत न मिलने के बाद अब मामला कर्नाटक हाईकोर्ट में है।
- रेगुलेटरी जुर्माना: बैंक को RBI की गाइडलाइन्स के तहत ₹29.60 लाख का जुर्माना और SEBI की LODR रेगुलेशन सेटलमेंट के लिए ₹5.88 लाख का भुगतान करना पड़ा है।
वर्कफोर्स और साइबर सुरक्षा
बैंक का एम्प्लॉई टर्नओवर रेट फिलहाल 47% है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले बेहतर हुआ है, लेकिन अभी भी यह एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वहीं, साइबर सुरक्षा के मोर्चे पर बैंक ने कोई भी डेटा ब्रीच न होने का दावा किया है और 100% साइबर सुरक्षा ट्रेनिंग पूरी की है।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट में चल रहा कानूनी विवाद सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, 47% के हाई एम्प्लॉई टर्नओवर को कम करना बैंक की ऑपरेशनल एफिशिएंसी के लिए आने वाले समय में एक बड़ी परीक्षा होगी।
