Dhoot Industrial Finance के FY26 नतीजे और डिविडेंड का ऐलान
Dhoot Industrial Finance Ltd ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त हुए फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने ऑडिटेड नतीजों की घोषणा की है। कंपनी ने ₹41.16 करोड़ के रेवेन्यू पर ₹17.99 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले फाइनेंशियल ईयर (FY25) में, कंपनी का नेट प्रॉफिट ₹18.88 करोड़ और रेवेन्यू ₹40.34 करोड़ था।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शेयरधारकों की मंजूरी के अधीन, ₹1.50 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड (Dividend) की सिफारिश की है।
NBFC के दर्जे से बाहर निकलने की बड़ी रणनीति
एक बड़े स्ट्रेटेजिक कदम के तहत, कंपनी ने 1 जुलाई, 2026 से प्रभावी रूप से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर डी-रजिस्टर (De-register) होने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को आवेदन करने का प्रस्ताव दिया है। इस डी-रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 31 दिसंबर, 2026 है। यह कदम Dhoot Industrial Finance के बिजनेस मॉडल और रेगुलेटरी ओवरसाइट में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
गवर्नेंस में हुए अहम बदलाव
कंपनी ने अपनी गवर्नेंस स्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए सुश्री प्रियंका कोठारी को पांच साल के कार्यकाल के लिए एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (Additional Independent Director) के रूप में नियुक्त किया है। इसके अलावा, M/s. P. P. Mutha & Associates को फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए इंटरनल ऑडिटर (Internal Auditor) नियुक्त किया गया है।
आगे की राह और जोखिम
अगर RBI डी-रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दे देता है, तो Dhoot Industrial Finance 1 जुलाई, 2026 से NBFC के तौर पर काम करना बंद कर देगी। इस बदलाव से कंपनी के ऑपरेशनल फोकस और कंप्लायंस की ज़रूरतों में परिवर्तन की उम्मीद है। सबसे बड़ा जोखिम RBI की आवश्यक मंजूरी प्राप्त करना है, क्योंकि किसी भी देरी या अस्वीकृति से कंपनी की योजनाओं पर असर पड़ सकता है। निवेशक इस संभावित बदलाव के बाद कंपनी के प्रदर्शन और रणनीति पर बारीकी से नज़र रखेंगे।
मुख्य मेट्रिक्स:
- नेट प्रॉफिट FY2026: ₹17.99 करोड़ (FY2025 में ₹18.88 करोड़ से कम)
- रेवेन्यू FY2026: ₹41.16 करोड़ (FY2025 में ₹40.34 करोड़ से ज़्यादा)
- अनुशंसित डिविडेंड: ₹1.50 प्रति शेयर
- NBFC डी-रजिस्ट्रेशन लक्ष्य तिथि: 1 जुलाई, 2026
क्या ध्यान में रखें:
डिविडेंड प्रस्ताव पर शेयरधारकों की वोटिंग, NBFC डी-रजिस्ट्रेशन आवेदन पर RBI का फैसला, और इस संभावित बदलाव के बाद कंपनी की बदलती बिजनेस स्ट्रैटेजी और फाइनेंशियल रिजल्ट्स पर नज़र रखनी होगी।
