Dharani Finance Ltd का नेट प्रॉफिट (PAT) वित्त वर्ष 2025-26 में घटकर **₹55.46 लाख** रह गया है, जो पिछले साल **₹83.79 लाख** था। कंपनी के सालाना रिपोर्ट में ऑडिटर ने अनरिकवर्ड **₹200 लाख** के डिपॉजिट को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
फाइनेंशियल परफॉर्मेंस और ऑडिट का पेंच
Dharani Finance ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपनी सालाना रिपोर्ट पेश की है। कंपनी का नेट प्रॉफिट (PAT) गिरकर ₹55.46 लाख रहा, जबकि रेवेन्यू ₹139.80 लाख के करीब स्थिर रहा। हालांकि, मुनाफे में कमी के बावजूद कंपनी ने अपने लोन बुक को ₹838.44 लाख से बढ़ाकर ₹896.00 लाख तक पहुंचा दिया है।
ऑडिटर की कड़ी टिप्पणी
स्टैच्युटरी ऑडिटर Srivatsan & Associates ने कंपनी की रिपोर्ट पर 'Qualified Opinion' जारी किया है। मुख्य चिंता का विषय ₹200 लाख का इंटर-कॉरपोरेट डिपॉजिट (ICD) है, जो Aryav Exports Private Limited को दिया गया था। साल 2017 से इस पर कोई ब्याज नहीं मिला है। ऑडिटर्स का मानना है कि यदि इस राशि का पूरा प्रोविजनिंग किया जाता है, तो कंपनी के 'नेट ओन फंड्स' (NOF) RBI के अनिवार्य मानकों से नीचे गिर सकते हैं, जिससे NBFC के तौर पर कंपनी का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।
निवेशकों के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?
यह मामला अब सीधे तौर पर कंपनी के भविष्य से जुड़ा है। अगर कंपनी जल्द ही इन अटके हुए पैसों की वसूली नहीं कर पाती है या फ्रेश कैपिटल नहीं लाती है, तो उसे रेगुलेटरी संकट का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, लिक्विडिटी को बचाने के लिए बोर्ड ने इस साल किसी भी तरह के डिविडेंड की घोषणा नहीं की है। इसके अलावा, कंपनी का भारी एक्सपोजर Dharani Developers Private Limited (₹328 लाख) और Appu Hotels Limited (₹240 लाख) जैसी संबंधित कंपनियों में भी देखा गया है।
