Delhivery की पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी, DFSPL, ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के तौर पर काम करने का सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) हासिल कर लिया है। यह लाइसेंस **3 अगस्त 2026** से प्रभावी होगा, जिससे कंपनी वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में अपनी नई शुरुआत करने के लिए तैयार है।
RBI से मिली मंजूरी, अब DFSPL बनेगी NBFC
Delhivery Limited ने ऐलान किया है कि उनकी सब्सिडियरी, Delhivery Financial Services Private Limited (DFSPL), को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से NBFC का लाइसेंस मिल गया है। यह लाइसेंस 3 अगस्त 2026 से लागू होगा और DFSPL को 'टाइप II-NBFC-ND' (नॉन-डिपॉजिट टेकिंग) के तौर पर वर्गीकृत करेगा।
नई राहें खुलेंगी, वित्तीय सेवाओं में कदम
यह लाइसेंस DFSPL के लिए एक बड़ा कदम है, जो कंपनी को वित्तीय सेवाओं की पेशकश शुरू करने की आधिकारिक अनुमति देता है। अब तक यह सब्सिडियरी प्लानिंग फेज (planning phase) में थी, लेकिन RBI की मंजूरी के बाद यह एक रजिस्टर्ड ऑपरेशनल एंटिटी (registered operational entity) बन गई है। कंपनी अब अपनी वित्तीय सेवाओं से जुड़े प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को बाजार में उतारने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
कब क्या हुआ?
DFSPL ने 14 जुलाई, 2026 को अपना डॉक्यूमेंटेशन सबमिट किया था, जिसके बाद यह डेवलपमेंट सामने आया है। कंपनी इस नई सेवा शुरू करने के लिए काफी समय से तैयारी कर रही थी।
आगे क्या?
अब सभी की नजरें DFSPL के अगले कदमों पर होंगी। यह देखना अहम होगा कि कंपनी कौन-कौन से खास फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स (financial products) और सर्विसेज (services) लॉन्च करती है, और इस नए बिजनेस लाइन के लिए कैपिटल डिप्लॉयमेंट (capital deployment) और मार्केट एंट्री स्ट्रैटेजी (market entry strategy) क्या रहती है। इस क्षेत्र में एग्जीक्यूशन रिस्क (execution risk) और कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप (competitive landscape) को नेविगेट करना कंपनी के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
