DCM Financial Services ने सितंबर तिमाही के लिए **₹0.23 करोड़** का नेट लॉस रिपोर्ट किया है, लेकिन ऑडिटर्स ने इसे चौंकाने वाला करार दिया है। ऑडिटर्स का कहना है कि कंपनी ने **₹1.43 करोड़** का ब्याज खर्च नहीं दिखाया है, जिससे असल घाटा कहीं ज्यादा है।
ऑडिटर्स की रिपोर्ट में खुला बड़ा राज
DCM Financial Services के सितंबर तिमाही के अन-ऑडिटेड नतीजों पर अब सवाल खड़े हो गए हैं। कंपनी ने भले ही ₹0.23 करोड़ का घाटा दिखाया हो, लेकिन स्टैचुअरी ऑडिटर्स ने अपनी 'लिमिटेड रिव्यू रिपोर्ट' में गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं। कंपनी पर आरोप है कि उसने डिबेंचर, बिल पेबल और फिक्स्ड डिपॉजिट पर होने वाले ब्याज के प्रावधान को नजरअंदाज किया, जिससे कंपनी का वास्तविक घाटा ₹1.43 करोड़ तक कम दिखाया गया।
रेगुलेटरी नियमों का उल्लंघन
कंपनी के लिए परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। नियमों के अनुसार कंपनी को ₹20.15 करोड़ का 'डिबेंचर रिडेम्पशन रिजर्व' (DRR) बनाना अनिवार्य था, जिसे बनाने में कंपनी नाकाम रही है। इसके अलावा, ऑडिटर्स को कंपनी के ट्रेड रिसीवेबल्स, सिक्योरिटी डिपॉजिट और बैंक बैलेंस की पुष्टि करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, जिससे कंपनी के इंटरनल फाइनेंशियल कंट्रोल पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।
निवेशकों के लिए चेतावनी (Risk Factors)
कंपनी के सामने कई बड़े खतरे मंडरा रहे हैं:
- एसेट सिक्योरिटी: डिबेंचर होल्डर्स और बैंकों के पास गिरवी रखी गई संपत्तियों की वैल्यू घटने की आशंका है।
- कानूनी विवाद: NBCC Ltd के साथ साल 1995 से चला आ रहा एक प्रॉपर्टी विवाद अब ₹2.88 करोड़ की संभावित देनदारी बनकर सामने आया है।
- गवर्नेंस रिस्क: जरूरी बैलेंस कन्फर्मेशन न होने से कंपनी के बही-खातों की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह है।
निवेशकों को अब कंपनी मैनेजमेंट की ओर से आने वाले स्पष्टीकरण और DRR से जुड़े अपडेट्स पर पैनी नजर रखने की सलाह दी जाती है।
