Crescentis Capital का बड़ा कदम: NBFC बनी कंपनी, ₹80 करोड़ राइट्स इश्यू की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Crescentis Capital का बड़ा कदम: NBFC बनी कंपनी, ₹80 करोड़ राइट्स इश्यू की तैयारी

Crescentis Capital, जो पहले Som Datt Finance के नाम से जानी जाती थी, ने अपना नाम बदलकर NBFC-ICC मॉडल अपनाया है। कंपनी ने ₹1.55 करोड़ की कुल आय दर्ज की और अपने नेट लॉस को घटाकर ₹2.53 करोड़ कर दिया। विस्तार के लिए ₹80 करोड़ तक राइट्स इश्यू के जरिए फंड जुटाने की योजना है।

Crescentis Capital लिमिटेड का बड़ा बदलाव: NBFC मॉडल में एंट्री, ग्रोथ पर फोकस

Crescentis Capital Limited (पहले Som Datt Finance Corporation Limited) ने अपना नाम बदलकर NBFC-ICC (नॉन-डिपॉजिट टेकिंग, बेस लेयर) मॉडल अपना लिया है। कंपनी अब लोन देने का काम शुरू कर चुकी है, जिसमें टर्म लोन, वर्किंग कैपिटल और पर्सनल लोन शामिल हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए, कंपनी की कुल आय ₹1.55 करोड़ रही, जो पिछले साल के ₹3.02 करोड़ के नुकसान से एक बड़ा सुधार है। वहीं, नेट लॉस घटकर ₹2.53 करोड़ रह गया, जो पिछले वर्ष ₹5.42 करोड़ था।

क्यों है यह महत्वपूर्ण?

Crescentis Capital के लिए यह एक बड़ा रणनीतिक बदलाव है। NBFC मॉडल में आने और लोन ऑपरेशन शुरू करने से कंपनी की कमाई में सकारात्मक रुझान दिख रहा है। ₹80 करोड़ का राइट्स इश्यू (Rights Issue) कंपनी के विस्तार की मंशा को दर्शाता है। इससे शेयरधारकों के लिए भविष्य में ग्रोथ के नए अवसर खुल सकते हैं।

जानिए पिछला इतिहास

6 जनवरी 2026 को कंपनी का नाम Som Datt Finance Corporation Limited से बदलकर Crescentis Capital Limited किया गया। जुलाई 2025 में, कंपनी ने ₹49.04 करोड़ का राइट्स इश्यू लाया था, जो 123% ओवरसब्सक्राइब हुआ था। इस फंड से लोन ऑपरेशन की शुरुआत करने में मदद मिली, जो जून 2025 में शुरू हुआ था।

आगे क्या?

अब Crescentis Capital MSME, रिन्यूएबल एनर्जी और हेल्थकेयर फाइनेंसिंग पर ध्यान केंद्रित करेगी। कंपनी का लक्ष्य ₹80 करोड़ के राइट्स इश्यू से जुटाई गई पूंजी की मदद से अपने लोन पोर्टफोलियो को बढ़ाना है। निवेशक अब लोन बुक ग्रोथ, एसेट क्वालिटी और नई पूंजी के सही इस्तेमाल पर नजर रखेंगे।

जोखिमों पर ध्यान दें

कंपनी अभी अपने लेंडिंग ऑपरेशन के शुरुआती चरण में है। हालांकि, इक्विटी इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो पर हुए अवास्तविक फेयर वैल्यू लॉस (unrealized fair value losses) की वजह से नेट प्रॉफिट/लॉस पर असर पड़ रहा है, भले ही ये नॉन-कैश आइटम हों। 31 मार्च 2026 तक, ₹45.95 करोड़ के नेट लोन बुक पर ग्रॉस एनपीए (Gross NPA) 0.34% और नेट एनपीए (Net NPA) 0.26% था। जैसे-जैसे पोर्टफोलियो बढ़ेगा, इन पर बारीकी से नजर रखना जरूरी होगा।

क्या करें ट्रैक?

निवेशकों को ₹80 करोड़ के प्रस्तावित राइट्स इश्यू की प्रगति, लोन पोर्टफोलियो की ग्रोथ और एसेट क्वालिटी को बनाए रखने पर नजर रखनी चाहिए। इक्विटी इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो का प्रदर्शन और रिपोर्टेड अर्निंग्स पर इसका असर भी महत्वपूर्ण होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.