Central Bank of India की अनुपालन रिपोर्ट में गवर्नेंस की खामियां
Central Bank of India वित्तीय वर्ष 2026 (जो 31 मार्च 2026 को समाप्त हुआ) के लिए अपनी सीक्रेटेरियल कंप्लायंस रिपोर्ट में बोर्ड की संरचना से जुड़े कई नियमों का पालन नहीं कर पाया है।
मुख्य चिंताएं:
- स्वतंत्र निदेशकों (Independent Directors) की पर्याप्त संख्या नहीं।
- बोर्ड में किसी भी महिला डायरेक्टर का न होना।
- डायरेक्टरों के कई पद खाली होना।
इन कमियों के चलते बैंक, बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट और SEBI के लिस्टिंग ऑब्लिगेशन्स एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) का पूरी तरह से पालन नहीं कर पा रहा है।
निवेशकों के लिए क्यों है अहम?
बोर्ड संरचना में ये कमियां निवेशकों के मन में बैंक के कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर चिंता पैदा कर सकती हैं। हालांकि, बैंक की तरफ से कहा गया है कि ऑपरेशनल कंप्लायंस सही है, लेकिन बोर्ड में खाली पदों के कारण रणनीतिक फैसलों और निगरानी में देरी हो सकती है। बैंक की नियुक्तियों के लिए वित्तीय सेवा विभाग (DFS) पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती है।
क्या है वजह?
बैंक इन खाली पदों को भरने के लिए लगातार DFS से संपर्क में है। यह स्थिति कुछ सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) में आम है, जहां बोर्ड की नियुक्तियां सरकारी नामांकनों पर निर्भर करती हैं।
आगे क्या?
फिलहाल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। बैंक सरकार के साथ नियुक्तियों को लेकर बातचीत जारी रखे हुए है। निवेशकों को इन नियुक्तियों की प्रगति पर नजर रखनी चाहिए।
जोखिम क्या हैं?
मुख्य जोखिम यह है कि बोर्ड नियमों के तकनीकी अनुपालन में लगातार देरी से रेगुलेटरी जांच बढ़ सकती है। इसके अलावा, BSE के पास बेसल III कंप्लायंट टियर II बॉन्ड्स के लिए 'नोटिस ऑफ रिकॉर्ड डेट' जमा करने में हुई पिछली गलती के संबंध में एक वेवर (Waiver) के लिए आवेदन भी लंबित है। यह आवेदन 6 नवंबर 2024 को किया गया था।
आगे क्या देखना होगा?
निवेशकों को सरकार की ओर से बोर्ड में खाली पदों को भरने के लिए नियुक्तियों के संबंध में किसी भी अपडेट पर नजर रखनी चाहिए। BSE के साथ लंबित वेवर आवेदन का समाधान भी एक महत्वपूर्ण पहलू होगा।
