Capital Trust का बड़ा झटका! FY26 में ₹46.82 करोड़ का हुआ नेट लॉस, बदली बिज़नेस रणनीति

BANKINGFINANCE
Whalesbook Corporate News Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Capital Trust का बड़ा झटका! FY26 में ₹46.82 करोड़ का हुआ नेट लॉस, बदली बिज़नेस रणनीति

Capital Trust ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए **₹46.82 करोड़** का शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया है। यह पिछले साल के मुनाफे से एक बड़ा उलटफेर है। कंपनी अब असुरक्षित MSME लेंडिंग से हटकर सुरक्षित गोल्ड लोन मॉडल की ओर बढ़ रही है ताकि अपने पोर्टफोलियो को बेहतर बना सके।

क्या हुआ?

Capital Trust Limited ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹46.82 करोड़ का भारी शुद्ध घाटा (Net Loss) दर्ज किया है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने ₹1.11 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया था। इस दौरान कंपनी की कुल आय (Total Income) में भी 55.9% की बड़ी गिरावट आई और यह ₹42.36 करोड़ पर आ गई। इसके अलावा, राइट-ऑफ (Write-offs) और इम्पेयरमेंट (Impairment) में 500% से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई, जो ₹12.33 करोड़ तक पहुंच गया।

यह क्यों मायने रखता है?

यह नतीजे Capital Trust के लिए एक चुनौतीपूर्ण साल को दर्शाते हैं। कंपनी अपने बिज़नेस मॉडल में बड़ा बदलाव कर रही है। अब वह असुरक्षित MSME लेंडिंग से हटकर सुरक्षित गोल्ड लोन बिज़नेस पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस बदलाव का मकसद एसेट क्वालिटी (Asset Quality) को सुधारना, क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) को कम करना और पोर्टफोलियो को मज़बूत बनाना है। बढ़ा हुआ राइट-ऑफ पिछले लोन बुक में मौजूद तनाव को दिखाता है, इसलिए नए मॉडल की सफलता कंपनी के भविष्य के लिए बहुत अहम है।

इसके पीछे की कहानी

वित्त वर्ष 2024-25 में, Capital Trust ने ₹96.00 करोड़ की कुल आय पर ₹1.11 करोड़ का मामूली आफ्टर-टैक्स प्रॉफिट (After-tax Profit) कमाया था। हालांकि, कंपनी लगातार सेक्टर में आ रही मुश्किलों, खासकर असुरक्षित MSME और माइक्रोफाइनेंस सेगमेंट में, का सामना कर रही थी। कंपनी का कहना है कि महंगाई और ग्रामीण आय में अस्थिरता इसके पीछे के कारण हैं। इसी दबाव के चलते गोल्ड लोन और पार्टनरशिप-आधारित, एसेट-लाइट मॉडल (Asset-light model) को अपनाने का फैसला लिया गया है।

अब क्या बदलेगा?

Capital Trust ने अक्टूबर 2025 में आधिकारिक तौर पर अपना गोल्ड लोन बिज़नेस शुरू कर दिया है। अब तक छह डेडिकेटेड ब्रांच खुल चुकी हैं। कंपनी बिज़नेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) व्यवस्थाओं के ज़रिए एसेट-लाइट मॉडल भी अपना रही है, जिससे वह फर्स्ट लॉस डिफ़ॉल्ट गारंटी (FLDG) के बिना लोन की सोर्सिंग और सर्विसिंग कर सकेगी। इस स्ट्रैटेजिक बदलाव का मुख्य उद्देश्य बैलेंस शीट को डी-रिस्क (De-risk) करना और एक स्थिर, फी-आधारित आय (Fee-based income) स्ट्रीम बनाना है।

किन जोखिमों पर नज़र रखें?

मुख्य जोखिमों में कंपनी की पुरानी लोन बुक में लगातार बना हुआ तनाव शामिल है, जैसा कि इम्पेयरमेंट में तेज़ बढ़ोतरी से पता चलता है। Careedge Ratings द्वारा कंपनी को दी गई सब-इन्वेस्टमेंट-ग्रेड रेटिंग (BB (SO)) की वजह से उधार लेने की लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, सुरक्षित लेंडिंग के दायरे में भी ग्रामीण और अनौपचारिक कर्जदारों के साथ जुड़ा क्रेडिट रिस्क मौजूद है।

आगे क्या देखें?

निवेशकों को गोल्ड लोन पोर्टफोलियो के विस्तार, पार्टनरशिप-आधारित लेंडिंग मॉडल के प्रदर्शन और पुरानी लोन बुक से क्रेडिट नुकसान को नियंत्रित करने पर करीब से नज़र रखनी चाहिए। कंपनी की फंडिंग लागतों को प्रबंधित करने और अपनी क्रेडिट रेटिंग में सुधार करने की क्षमता भी कंपनी के टर्नअराउंड (Turnaround) की प्रगति के महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.