कैपिटल ट्रस्ट ने लैंडिंग मॉडल में किया बड़ा बदलाव
Q4 FY26 में ₹89.4 करोड़ का डिस्बर्समेंट; ₹0.13 करोड़ का ऑपरेटिंग PBT दर्ज।
निवेशकों के लिए खास: कैपिटल ट्रस्ट के सुरक्षित लैंडिंग में जाने से ऑपरेटिंग मुनाफा बढ़ा है, लेकिन एक बार के राइट-ऑफ (write-off) से नेट प्रॉफिट प्रभावित हुआ। निवेशकों को पुराने पोर्टफोलियो के असर पर नजर रखनी होगी।
क्या हुआ?
कैपिटल ट्रस्ट लिमिटेड ने फाइनेंशियल ईयर 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी ने पिछले एक साल में अपने 100% अनसिक्योर्ड (Unsecured) वाले खुद के पैसे से उधार देने वाले मॉडल से एक नया रास्ता अपनाया है। अब कंपनी सुरक्षित कर्ज (Secured Lending), जिसमें गोल्ड लोन (Gold Loan) फ्रेंचाइजी भी शामिल है, और माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) के लिए ऑफ-बैलेंस शीट पर साझेदारी-आधारित को-लेंडिंग (Co-lending) मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
Q4 FY26 में, कैपिटल ट्रस्ट ने ₹0.13 करोड़ का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) दर्ज किया। कुल डिस्बर्समेंट (Disbursement) तीसरी तिमाही के मुकाबले 4.5 गुना बढ़कर ₹89.4 करोड़ हो गया। कुल उधार (Borrowings) को काफी कम करके ₹24.2 करोड़ कर दिया गया है, जो Q4 FY25 के ₹93.2 करोड़ से काफी कम है। कंपनी ने 0% नेट एनपीए (Net NPA) भी रिपोर्ट किया है।
एक बड़ा, एक बार का, नॉन-कैश (non-cash) राइट-ऑफ, जिसमें ₹19 करोड़ का डेफ़र्ड टैक्स एसेट (Deferred Tax Asset) शामिल था, उसने इस अवधि के रिपोर्टेड नेट प्रॉफिट को प्रभावित किया।
यह क्यों मायने रखता है?
इस स्ट्रेटेजिक बदलाव का मकसद सुरक्षित संपत्ति को प्राथमिकता देकर और लोन ओरिजिनेशन के लिए साझेदारियों का लाभ उठाकर बिजनेस के जोखिम को कम करना है। डिस्बर्समेंट में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी और उधार में कमी इस नई रणनीति के लागू होने में प्रगति का संकेत देते हैं। सकारात्मक ऑपरेटिंग PBT बताता है कि मुख्य व्यवसाय नए मॉडल के तहत आय उत्पन्न कर रहा है, जबकि 0% नेट एनपीए संपत्ति की गुणवत्ता में सुधार का संकेत देता है।
पृष्ठभूमि
कैपिटल ट्रस्ट ने पिछले एक साल में एक बड़े पुनर्गठन से गुजरा है। कंपनी ऐतिहासिक रूप से उच्च जोखिम वाले अनसिक्योर्ड (Unsecured) कर्ज मॉडल पर काम करती थी। अपनी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने और अपने जोखिम प्रोफाइल को बेहतर बनाने के लिए, इसने नवंबर 2025 में ₹23.8 करोड़ के राइट्स इश्यू (Rights Issue) के माध्यम से पूंजी जुटाई थी, जो 1.33 गुना ओवरसब्सक्राइब हुआ था। इस पूंजी निवेश ने, सुरक्षित संपत्ति पर ध्यान केंद्रित करने के साथ मिलकर, इसके डेट-टू-टीएनडब्ल्यू (Debt-to-TNW) लीवरेज को 1x से नीचे लाने में मदद की है।
अब क्या बदलेगा?
कंपनी अब अपने सुरक्षित गोल्ड लोन व्यवसाय और को-लेंडिंग (Co-lending) साझेदारियों को बढ़ाने के लिए तैयार है। परिचालन फोकस इन सेगमेंट में डिस्बर्समेंट (Disbursement) का विस्तार करना होगा। बैलेंस शीट साफ दिख रही है, जिसमें उधार कम हुआ है और पूंजी पर्याप्तता (CRAR >35%) में सुधार हुआ है।
जोखिम जिस पर नजर रखनी है
मुख्य चिंता एक बार का ₹19 करोड़ का राइट-ऑफ है जिसने नेट प्रॉफिट को प्रभावित किया। निवेशकों को परिचालन प्रदर्शन (PBT) और ऐसे असाधारण मदों से प्रभावित नेट प्रॉफिट के बीच अंतर करना होगा। हालांकि कंपनी का कहना है कि ₹294 करोड़ के पुराने पोर्टफोलियो के लिए प्रोविजनिंग (provisioning) पूरी हो चुकी है, फिर भी इस पुराने पोर्टफोलियो से कोई और समस्या न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की आवश्यकता होगी।
संदर्भ मेट्रिक्स
- मासिक डिस्बर्समेंट अक्टूबर 2025 में ₹1.9 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 तक ₹43.1 करोड़ हो गया।
- मार्च 2026 तक, कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 56%, जो ₹89.0 करोड़ था, उसे शून्य-क्रेडिट जोखिम या पूरी तरह से सुरक्षित के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
- Q4 FY26 में कुल AUM ₹158 करोड़ था, जिसमें Own AUM ₹32.8 करोड़ और Managed AUM ₹125.2 करोड़ था।
आगे क्या देखना है
निवेशक सुरक्षित और को-लेंडिंग (Co-lending) सेगमेंट में डिस्बर्समेंट (Disbursement) की निरंतर वृद्धि पर नजर रखेंगे। परिचालन लाभप्रदता बनाए रखने की क्षमता और पुराने पोर्टफोलियो से कोई और समस्या न आना, नए बिजनेस मॉडल की सफलता के प्रमुख संकेतक होंगे।
